WHAT IS CHATGPT IN HINDI? | CHATGPT KAISE USE KARTE HAI?

chatgpt kya hai

CHATGPT क्या है और काम कैसे करता है?

Chat GPT kya hai : नमस्कार दोस्तों, आज के इस लेख में हम आपको एक  ऐसी टेक्नोलॉजी के बारे में बताएंगे जिसके बारे में आपने कभी सोचा ही नहीं होगा इंटरनेट की दुनिया में आज ChatGPT काफी फेमस हो रही है।

इसके बारे में यह भी कहा जा रहा है। क्या आने वाले समय में यह गूगल को भी टक्कर दे सकता है इसका जवाब आपको हमने इस लेख में नीचे दिया है यह एकआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल है।

Chat GPT को दूसरा गूगल माना जाता है जो लोग टेक्नोलॉजी की दुनिया में दिलचस्पी रखते हैं उन्हें इसके बारे में बखूबी से पता हुआ आइए जानते हैं किस आर्टिकल में चैट जीटीपी की पूरी कहानी तो हमारे इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें। 

चैट जीपीटी क्या है (WHAT IS CHATGPT?)

what is chatgpt

Image of What is Chatgpt in Hindi

चैट जीपीटी एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी है इस का फुल फॉर्मचैट जेनरेटिव प्रिट्रेंड ट्रांसफार्मर होता है। इसका आविष्कार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के द्वारा किया गया।

इसी के कारण यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ही काम करेगा चैट जीपीटी की मदद से हम किसी भी प्रश्न का जवाब आसानी से सरल शब्दों में प्राप्त कर सकते हैं।

वर्तमान समय में चैट जीटीपी सिर्फ  इंग्लिश भाषा को ही ज्यादा कैप्चर करता है हालांकि आने वाले समय में इसे कंपनी के द्वारा अपडेट किया जा रहा है जिससे किसी भी भाषा में पूछे गए सवाल का जवाब आसानी से दे सकता है।

चैट जीपीटी को 30 नवंबर 2022 को लांच किया था यह एक प्रकार का कोट है वर्तमान समय में इसके यूजर की संख्या लगभग 4 मिलियन के आसपास पहुंच गई है।

CHAT GPT HIGHLIGHT 2024

TypeArtificial intelligence chatbot
NameChat GPT
CEOSam altman
Original authorOpen Ai
Sitechat.openai.com

चैट जीपीटी का इतिहास (CHAT GPT KI HISTORY)

Chat GPT की शुरुआत 2015 में Sem Altman और Elon Musk के द्वारा की गई थी लेकिन उस समय यह एक Non profit company थी। एलन मस्क ने इस कंपनी में 2 साल काम करने के बाद बीच में ही इस प्रोजेक्ट को छोड़ दिया हालांकि माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के द्वारा इसमें काफी निवेश किया गया था।

फिर चैट जीपीटी को Prototype के तौर पर 30 नवंबर 2022 को लांच किया था चैट जीपीटी का आविष्कार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के द्वारा किया गया है।

इस कंपनी के एक अधिकारी जिनका नाम सेम ऑल्टमैन है वह बताते हैं कि वर्तमान में चैट जीपीटी user की संख्या लगभग 3 मिलियन के पास पहुंच चुकी है।

WHAT IS CHATGPT 4? CHATGPT 4 KYA HAI?

chatgpt 3.5 का ही अपग्रेडेड वर्शन chatgpt 4 है। जिसमे हमें काफी कुछ फैसिलिटी देखने को मिल जाती है। इस 4 वर्शन को openAI के द्वारा 2023 में लांच किया गया था। इसमें काफी कुछ एडवांस टेक्नोलॉजी का use किया गया है जिससे ये और भी स्मार्टली तरीके से वर्क करता है।

Basically देखा जाये तो ये massive dataset और कोड के आधार पर train किया गया है। जिसके द्वारा हमलोग टेक्स्ट generate कर सकते है डिफरेंट लैंग्वेज को ट्रांसलेट कर सकते है। डिफरेंट टाइप के कंटेंट को क्रिएट कर सकते है। इसके द्वारा कोई भी question का मल्टीप्ल answer हमलोग काफी easy way में सर्च कर सकते है।

इसका सबसे खास बात ये है की ये अपने यूजर के सभी कमांड को कस्टमाइज करने का आप्शन देता है। जैसे की यूजर जैसे चाहे अपने कमांड को length, style, details और अलग अलग भाषाओं के अनुसार मॉडिफाई और अपडेट कर सकते है। chatgpt4 काफी कुछ customization provide करता है जिससे हमारा कंटेंट और भी बेहतर हो सकता है।

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चैट जीपीटी की विशेषताएं ( CHATGPT KE FEATURE)

आइए जानते हैं चैट जीपीटी की क्या-क्या विशेषता है जिसके कारण वह आज पूरी दुनिया में इतना ज्यादा फेमस हो गया है।

  • इसका use कंटेंट तैयार करने के लिए किया जाता है।
  • चैट जीपीटी का उपयोग करने के लिए किसी भी यूजर को पैसे नहीं लिए जाएंगे क्योंकि वर्तमान में इसे बिल्कुल मुफ्त कर दिया है।
  • चैट जीपीटी की मदद से आप बायोग्राफी, निबंध, एप्लीकेशन, जैसे इत्यादि चीजें आसानी से लिखवा सकते हैं।
  • इस सुविधा से आप जो भी सवाल पूछते हैं उसका जवाब बहुत ही आसानी से आपको मिल जाता है वह भी एक कम समय में।

चैट जीपीटी कैसे काम करता है (HOW CHATGPT WORKS?)

अब हम आपको चैट जीपीटी काम कैसे करता है इसके बारे में बताएंगे  वैसे तो इसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर हमने देखा है कि यह आखिर काम कैसे करता है चैट जीपीटी ट्रांसफॉर्मर नामक एक शक्तिशाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल का उपयोग करके काम करता है।

इसे इंटरनेट से बड़ी मात्रा में टेक्स्ट डेटा पर प्रशिक्षित किया जाता है, जो इसे भाषा के पैटर्न और संरचना को सीखने में मदद करता है।

मॉडल पाठ का विश्लेषण करके और कीवर्ड, की पहचान करके इनपुट को समझता है। इसके बाद यह प्रासंगिक उत्तर बनाने के लिए अपने ज्ञान का उपयोग करके प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।

इसे इस प्रकार बनाया गया है कि व्यक्ति इससे जिस प्रकार का सवाल या इनपुट देगा वह उसी भाषा में और इनपुट के हिसाब से उसका जवाब देगा वर्तमान समय में चैट जीपीटी को अच्छे प्रदर्शन और मनोज के साथ बातचीत करने में ज्यादा डिवेलप किया जा रहा है।

चैट जीपीटी के फायदे (CHATGPT KE ADVANTAGE)

इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल के फायदे के बारे में जानना हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि आज एआई के कारण टेक्नॉलॉजी पूरी तरह अस्त व्यस्त हो गई है और आने वाले समय में एआई बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है आइए जानते हैं चैट जीपीटी के फायदे के बारे में–

  • चैट जीपीटी की सर्विस को उपयोग लेने वाले किसी भी यूजर को कोई चार्ज नहीं लगता है।
  • हमारे द्वारा किसी भी प्रकार का सवाल chat GPT से पूछा जाता है तो वह बहुत सरल शब्दों में और सही जवाब देता है।
  • जब हम कोई भी जानकारी को ढूंढते हैं तो गूगल पर विभिन्न प्रकार की वेबसाइटों पर जाना पड़ता है लेकिन चैट जीपीटी से हम एक ही जहां पर कई प्रकार के सवाल को पूछ सकते हैं।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के द्वारा धीरे-धीरे एसजीपीटी को अपडेट किया जा रहा है इसमें नए नए फीचर्स आने लगे हैं।

चैट जीपीटी के नुकसान (CHATGPT KE DISADVANTAGE)

हमने अभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के द्वारा बनाई गई इस टेक्नोलॉजी के फायदे के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे अब जानते हैं कि इस टेक्नोलॉजी से हमें किस प्रकार के नुकसान भी हो सकते हैं आइए जानते हैं जैसे-

  • अभी सिर्फ अंग्रेजी भाषा में चैट जीपीटी सपोर्ट करता है।
  • इस टेक्नॉलजी के द्वारा कई सवालों के जवाब सही नहीं मिलते हैं।
  • वर्तमान में चैट जीपीटी को Paid कर दिया गया है अब यूजर को अपडेट वर्जन में को चार्ज देना होगा।
  • चैट जीपीटी के पास कई सवालों के जवाब नहीं मिलते हैं।

चैट जीपीटी से पैसे कैसे कमाए

अगर आप भी चैट जीपीटी  का इस्तेमाल करके घर बैठे लाखों रुपए कमाना चाहते हैं तो हम एक बहुत आसान पैसा कमाने तरीका बताएंगे वर्तमान समय में तो यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी सिर्फ इंग्लिश भाषा में ही काम कर रही है।

लेकिन आने वाले समय में जैसे-जैसे यह अपडेट होती जाएगी और भाषा को है कैप्चर करते जाएगी आइए जानते हैं कौन-कौन से तरीके हैं जिससे हम चैट जीपीटी के द्वारा पैसे कमा सकते हैं।

1Email business
2Youtube video scirpt
3Online services
4Content writing
5Content blog
6homework

CHATGPT का इस्तेमाल कैसे करें

How to use chatgpt

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आइए अब हम आपको बताते हैं कि आप चैट जीपीटी का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं वह भी बिना किसी पैसे को इन्वेस्ट करके आप बड़े आसानी से अपने लैपटॉप ChatGPT का इस्तेमाल कर सकते हैं।

  • सबसे पहले आपको गूगल पर ChatGPT लिखकर सर्च करना होगा।
  • उसके बाद आपके सामने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के द्वारा बनाए गए इस टेक्नोलॉजी का होम पेज खुल जाएगा।
  • उसके बाद आप अपनी ईमेल आईडी से Sing Up करना होगा।
  • अगर आप इसको पहली बार इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको लॉगिन करने की जरूरत नहीं रहती है।
  • यह सब प्रक्रिया होने के बाद आपके सामने एक बॉक्स खोलेगा वहां अपना नाम, मोबाइल नंबर को डालकर continue पर क्लिक करना होगा।
  • उसके बाद चैट जीपीटी के द्वारा आपके द्वारा दिए गए नंबर पर एक ओटीपी आएगा।
  • उस ओटीपी को सामने दिए गए बॉक्स में दर्ज करने के बाद वेरीफाइड बटन पर क्लिक करना होगा।
  • जैसे ही आप वेरिफिकेशन बटन पर क्लिक करते हैं आप ChatGPT को बड़े आसानी से ही चला सकते हैं।

CHATGPT के आने से क्या GOOGLE का अस्तित्व खतरे में है?

अगर आपलोग ये सोच रहे है की chatgpt के आने से गूगल खतरे में है तो ये गलत है। गूगल और chatgpt ये दोनों ही अलग अलग अल्गोरिथम पर वर्क करता है। इन दोनों का ही काम अलग अलग उद्देश्यों के लिए किया जाता है। 

chatgpt उन्ही सवालों का जवाब दे सकता है जिसका जवाब गूगल दे सकता है। गूगल सर्च के मायने में कही ज्यादा अच्छा है chatgpt से। आपलोग ये भी जानते ही होंगे की हमें गूगल में अलग अलग फॉर्मेट में भी सर्च करने का आप्शन मिलता है। जैसे की सर्च, image, video या फिर लोकेशन।

ये सब फीचर आपको chatgpt में देखने को नहीं मिलता है। आपको उपर में बताया गया है की chatgpt एक आर्टिफीसियल language lesson का मॉडल है जिसको समझने और react करने के लिए उसी के हिसाब से trained किया जाता है। लेकिन वही गूगल की बात करे तो ये वेब सर्च अलोरिथ्म पर वर्क कर के हमें रिजल्ट देता है।

तो इस तरह से आपलोग का ये डाउट क्लियर हो गया होगा की गूगल का अस्तित्व खतरे में नहीं है।

WHAT IS DIFFERENCE BETWEEN CHATBOT AND CHATGPT? CHATBOT और CHATGPT में क्या अंतर है?

what is difference between chatgpt and chatbot

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chatgpt और chatbot दोनों ही conversations based तकनीक पर कार्य करता है। लेकिन फिर भी इसमें कुछ बेसिक difference है जिसको मैं निचे बताने का कोशिस करता हूँ।

ChatGPT – ये open AI टेक्नोलॉजी पर काम करता है जो की AI का काफी एडवांस फीचर को use करता है। ये natural language processing और processing पर काम करता है। ये पूरा large scale database पर कार्य करता है। ये chatbot की तुलना में काफी फ्लेक्सिबल और तेज होता है। इसमें आपलोग पढ़ रहे है what is chatgpt के बारे में।

Chatbot – ये कंप्यूटर बेस्ड program है जो की लोगो से बातचीत के आधार पर कार्य करता है। जब भी use इनके साथ इंटरैक्ट होते है ये उसी के according सामने वाले को जवाब देते है। इसक अकार्य करने के तरीका काफी सरल है ये Predefine rules और response के साथ वर्क करता है। ये लिमिटेड टाइम में वर्क करता है। इसका मेन काम होता है यूजर के जरुरत के हिसाब से answer प्रोवाइड करना।

अंतिम शब्दों में

इस लेख में हमने आपको चैट जीपीटी (What is Chat GPT)  के बारे में विस्तार से सभी जानकारी बताइए किस तरह आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण टेक्नॉलॉजी में बहुत बड़ा बदलाव हो गया है.

कैसे चैट जीपीटी ने लोगों की जिंदगी को बदल दिया है और इससे कई लोग घर बैठे लाखों रुपए कमा रहा है इस प्रकार की सभी जानकारी हमने इस लेख में आपको बताई है.

आशा करते हैं दोस्तों हमारे द्वारा दी गई जानकारी से आपको सोएंगे इसी प्रकार और भी जानकारी प्राप्त करने के लिए हमें कमेंट करें और ऐसा भी जानकारी अपने दोस्तों को शेयर करें.

FAQs

चैट GPT क्या होता है?

ChatGPT एक भाषा मॉडल है, जिसे ओपनएआई (OpenAI) ने विकसित किया है। यह मॉडल संवादात्मक विन्यासों में सक्रिय बातचीत करने के लिए बनाया गया है।

चैट जीपीटी का फुल फॉर्म क्या है?

Ans : Chat Generative Pre-Trained Transformer

चैट जीपीटी कब लॉन्च हुआ?

30 नवंबर

चैट GPT कैसे काम करता है?

ChatGPT एक ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर का उपयोग करता है, जो एक गहन सीखने वाले Tool है। यह Tool डेटा को प्रक्रिया करके मानव जैसे प्रतिक्रियाएं उत्पन्न करता है। चैट GPT को इंटरनेट पर उपलब्ध महान संख्या के पाठ्य डेटा से पूर्व-प्रशिक्षित किया जाता है।

चैट GPT का उपयोग कहाँ हो सकता है?

चैट GPT को विभिन्न एप्लिकेशन और प्लेटफ़ॉर्म में एकीकृत किया जा सकता है, जिससे यह सवालों का जवाब दे सकता है, कार्यों में सहायता कर सकता है, विचार-विमर्श कर सकता है, और विभिन्न विषयों पर जानकारी प्रदान सकता है

WHAT IS VIDEO EDITING IN HINDI | BEST TIPS FOR VIDEO EDITING

what is video editing in hindi

WHAT IS VIDEO EDITING IN HINDI? विडियो एडिटिंग क्या है?

वीडियो एडिटिंग एक प्रक्रिया है जिसमें वीडियो के अलग-अलग अंशों को एक साथ जोड़कर उन्हें एक स्थिर वीडियो में संयोजित किया जाता है। इस प्रक्रिया में वीडियो के अलग-अलग अंशों को कट और ट्रिम किया जाता है और फिर उन्हें एक स्थिर वीडियो में संयोजित किया जाता है।
वीडियो एडिटिंग के द्वारा, वीडियो को और रोचक बनाया जाता है जिससे दर्शकों का ध्यान आकर्षित होता है। इस प्रक्रिया में ट्रांजिशन, एफएक्ट, टेक्स्ट, संगीत आदि जोड़े जाते हैं जो वीडियो को एक नया लुक देते हैं। वीडियो एडिटिंग का उपयोग फिल्म निर्माण, टीवी शो, वीडियो ब्लॉगिंग, यूट्यूब वीडियो आदि में किया जाता है।

TYPES OF VIDEO EDITING – विडियो एडिटिंग कितने प्रकार के होते है?

वीडियो एडिटिंग कई प्रकार की होती है। यह कुछ प्रमुख प्रकार हैं:
बेसिक एडिटिंग: इसमें वीडियो की कट-पेस्ट की जाती है जैसे कि वीडियो के अंत में लोगो या क्रेडिट दिखाना।

एडवांस एडिटिंग: इसमें वीडियो के अंशों को बदलने या फिर संपूर्ण वीडियो के साथ एफेक्ट, अलग-अलग ट्रांजिशन, संगीत, स्लाइड शो आदि का उपयोग किया जाता है।

फिल्म एडिटिंग: इसमें एक पूर्ण फिल्म की पोस्ट-प्रोडक्शन एडिटिंग की जाती है। इसमें संपूर्ण फिल्म के अंशों को संयोजित करना, कट-पेस्ट, एफेक्ट, संगीत और ट्रांजिशन का उपयोग किया जाता है।

वीडियो व्याख्यान एडिटिंग: इसमें वीडियो के साथ व्याख्यान को संपूर्ण किया जाता है और उसमें स्लाइड शो, टेक्स्ट, और उपयोगी तस्वीरें जोड़ी जाती हैं।

HOW TO EARN MONEY FROM VIDEO EDITING – विडियो एडिटिंग से पैसे कैसे कमायें?

वीडियो एडिटिंग से पैसे कमाने के कुछ लोकप्रिय तरीके हैं। नीचे दिए गए कुछ तरीकों को आप आजमा सकते हैं:

फ्रीलांसिंग: फ्रीलांसिंग वीडियो एडिटिंग से पैसे कमाने का एक लोकप्रिय तरीका है। आप ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों जैसे Fiverr, Upwork, Freelancer आदि पर अपना अकाउंट बना सकते हैं और अपनी वीडियो एडिटिंग सेवाओं की पेशकश कर सकते हैं। आप अपने कौशल और अनुभव के आधार पर क्लाइंट से प्रोजेक्ट्स मिलते रहेंगे और उन्हें पूरा करके आप पैसे कमा सकते हैं।
यूट्यूब: यूट्यूब वीडियो सामग्री साझा करने के लिए एक लोकप्रिय प्लेटफॉर्म है। आप अपनी वीडियो एडिटिंग से वीडियो बनाकर यूट्यूब पर अपलोड कर सकते हैं और यूट्यूब मोनेटाइजेशन प्रोग्राम के माध्यम से विज्ञापन से पैसे कमा सकते हैं। एक लोकप्रिय चैनल बनाने के लिए नियमितता और गुणवत्ता वाली सामग्री प्रदान करना बहुत महत्वपूर्ण है।
सोशल मीडिया और ऑनलाइन पर short video बना कर भी पैसा कमाया जा सकता है।

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विडियो एडिटिंग कैसे सिख सकते है? – HOW TO LEARN VIDEO EDITING IN HINDI

वीडियो एडिटिंग सीखने के कुछ आसान तरीके हैं। नीचे दिए गए कुछ सुझावों का अनुसरण करके आप वीडियो एडिटिंग सीख सकते हैं:
ऑनलाइन कोर्स: आजकल ऑनलाइन कोर्सेज वीडियो एडिटिंग सीखने के लिए बहुत ही लोकप्रिय हो रहे हैं। आप ऑनलाइन वीडियो एडिटिंग कोर्सेज जैसे Udemy, Skillshare, Coursera, आदि से अपनी पसंद के अनुसार कोर्स चुन सकते हैं और वीडियो एडिटिंग की पेशकश की गई जानकारी और वीडियो ट्यूटोरियल की मदद से सीख सकते हैं।
यूट्यूब ट्यूटोरियल्स: यूट्यूब वीडियो एक popular प्लेटफॉर्म है। जहा हम जो चाहे फ्री में सिख सकते है। आप यूट्यूब पर वीडियो एडिटिंग से संबंधित वीडियो ट्यूटोरियल्स देख सकते हैं और वीडियो एडिटिंग की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
अभ्यास: वीडियो एडिटिंग सीखने के लिए सबसे बेहतरीन तरीका है अभ्यास करना। आप किसी भी फ्री वीडियो एडिटिंग सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करके प्रैक्टिस कर के अच्छे से सिख सकते है। जितना प्रैक्टिस करेंगे उतना सिखने को मिलता है।

VIDEO EDITING में कौन कौन से सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किये जाते है?

what is video editing in hindi

Image of Video editing software in hindi

वीडियो एडिटिंग के लिए कुछ प्रमुख सॉफ्टवेयर हैं जिन्हें वीडियो एडिटिंग प्रोफेशनल्स द्वारा उपयोग किया जाता है। इनमें से कुछ प्रमुख सॉफ्टवेयर हैं:
1. Adobe Premiere Pro: यह सबसे लोकप्रिय वीडियो एडिटिंग सॉफ्टवेयर है जो फिल्म उद्योग में भी उपयोग किया जाता है।
2. Final Cut Pro: यह मैक उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध होता है और उन्हें वीडियो के लिए एडिटिंग के लिए सबसे अच्छा समर्थन देता है।
3. DaVinci Resolve: यह सबसे लोकप्रिय कोलर कोरेक्शन सॉफ्टवेयर है जो वीडियो एडिटिंग में उपयोग किया जाता है।
4. Avid Media Composer: यह सबसे लोकप्रिय फिल्म एडिटिंग सॉफ्टवेयर है जो हॉलीवुड फिल्मों में उपयोग किया जाता है।
5. HitFilm Express: यह एक नि: शुल्क वीडियो एडिटिंग सॉफ्टवेयर है जो बेगिनर्स के लिए उपयुक्त होता है।
ये Software Video Editing और पोस्ट-प्रोडक्शन कार्यों के लिए बेहतरीन टूल्स हैं।

मोबाइल विडियो एडिटिंग क्या है? – WHAT IS MOBILE VIDEO EDITING?

मोबाइल वीडियो एडिटिंग एक प्रकार का वीडियो एडिटिंग है जो स्मार्टफोन या टैबलेट जैसे मोबाइल उपकरणों के माध्यम से किया जाता है। यह वीडियो को कटौती करने, विभिन्न एफएक्ट जोड़ने, टेक्स्ट जोड़ने, अंतराल जोड़ने और अन्य पोस्ट-प्रोडक्शन कार्यों को संभव बनाता है।

मोबाइल वीडियो एडिटिंग के लिए कई मोबाइल एप्लिकेशन उपलब्ध हैं, जो बेहद उपयोगी होते हैं। कुछ उनमें से शामिल हैं:

1. Adobe Premiere Rush
2. iMovie
3. Kinemaster
4. FilmoraGo
5. InShot
6. Quik
7. VivaVideo
8. PowerDirector
9. VN Video Editor
10. Magisto

ये एप्लिकेशन वीडियो एडिटिंग के लिए मोबाइल डिवाइस पर एक्सेस प्रदान करते हैं और बेहद उपयोगी होते हैं जब आप अपने स्मार्टफोन पर वीडियो बनाना चाहते हैं या अपने सोशल मीडिया अकाउंटों पर शेयर करना चाहते हैं।

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VIDEO EDITING को ऑनलाइन कैसे सीखे?

आजकल विभिन्न ऑनलाइन संसाधन हैं जो आपको वीडियो एडिटिंग सीखने में मदद कर सकते हैं। यहाँ कुछ ऑनलाइन संसाधन हैं जो आपको वीडियो एडिटिंग सीखने में मदद करेंगे:
YouTube: YouTube पर आप वीडियो एडिटिंग सीखने के लिए वीडियो ट्यूटोरियल्स देख सकते हैं। यह आपको वीडियो एडिटिंग के लिए बेहतर तकनीक और टिप्स देगा।
Skillshare: Skillshare एक ऑनलाइन संसाधन है जो क्रिएटिव क्लासेस प्रदान करता है। आपको वीडियो एडिटिंग के लिए बेहतर तकनीक सीखने के लिए इसके माध्यम से कोर्स ले सकते हैं।
Udemy: Udemy एक अन्य ऑनलाइन संसाधन है जो वीडियो एडिटिंग कोर्स प्रदान करता है। इसके अलावा, आप इसके माध्यम से एक अनुभवी ट्यूटर से सीधे संपर्क कर सकते हैं जो आपको वीडियो एडिटिंग के बेहतर टिप्स देंगे।
ऑनलाइन ब्लॉग और वेबसाइट: विभिन्न वेबसाइट और ब्लॉग भी वीडियो एडिटिंग संबंधित ट्यूटोरियल प्रदान करते हैं।

VIDEO EDITING के लिए कैसा कंप्यूटर चाहिए?

विडियो एडिटिंग के लिए एक अच्छा कंप्यूटर चाहिए जिसमें अधिक RAM, बेहतर CPU, उच्च ग्राफिक्स कार्ड और पर्याप्त स्टोरेज की आवश्यकता होती है। आपको एक प्रोफेशनल वीडियो एडिटिंग सॉफ्टवेयर के साथ संगत हार्डवेयर की आवश्यकता होती है। एक अच्छी वीडियो कार्ड आपको स्मूद वीडियो रेंडरिंग और एडिटिंग के दौरान बेहतर ग्राफिक्स प्रदान कर सकती है।
आपके कंप्यूटर में कम से कम 8GB रैम होनी चाहिए। एक उच्च क्वालिटी वीडियो को एडिट करने के लिए, आपके कंप्यूटर में ज्यादा से ज्यादा रैम होनी चाहिए।
स्टोरेज की दृष्टि से, आपके कंप्यूटर में कम से कम 500GB स्टोरेज होनी चाहिए। विडियो एडिटिंग फ़ाइलें बहुत बड़ी होती हैं, इसलिए आपके पास पर्याप्त स्टोरेज स्पेस होना चाहिए।
अंत में, आपके कंप्यूटर में एक उच्च ग्राफिक्स कार्ड होना चाहिए जो बेहतर ग्राफिक्स प्रदान करता है जो वीडियो एडिटिंग के दौरान उपयोगी होता हैं।

कुछ अच्छे कंप्यूटर जिससे विडियो एडिट कर सकते है?

कुछ अच्छे कंप्यूटर जिनसे आप वीडियो एडिट कर सकते हैं हैं:
Apple MacBook Pro इसमें आपको उच्च ग्राफिक्स, शक्तिशाली प्रोसेसर और बहुत सारी अन्य फीचर्स मिलते हैं जो आपको वीडियो एडिटिंग के लिए सबसे अच्छा अनुभव देते हैं।
Dell XPS 15 यह कंप्यूटर भी एक उच्च ग्राफिक्स, प्रोसेसर और बहुत सारी फीचर्स के साथ आता है।
HP Spectre x360 इसकी बैटरी लाइफ लंबी होती है और यह भी वीडियो एडिटिंग के लिए बहुत अच्छा है।
ASUS ZenBook Pro Duo इसमें दो डिस्प्ले होते हैं, जो आपको वीडियो एडिटिंग के लिए बहुत मदद करते हैं। इसमें उच्च ग्राफिक्स, प्रोसेसर और अन्य फीचर्स भी होते हैं।
Lenovo ThinkPad X1 Extreme यह कंप्यूटर भी वीडियो एडिटिंग के लिए उपयुक्त है और यह एक शक्तिशाली प्रोसेसर के साथ आता है।

विडियो एडिटिंग करने के कुछ टिप्स 

what is video editing in hindi

Image of Video editing software in hindi

वीडियो एडिटिंग एक कला है और आप इसे सीखने के लिए समय, प्रयास और अभ्यास की आवश्यकता होती है। यहाँ कुछ वीडियो एडिटिंग के टिप्स हैं जो आपको मदद कर सकते हैं:-
स्टोरी बोर्ड का उपयोग करें: स्टोरी बोर्ड आपको अपने वीडियो को ओवरव्यू करने में मदद करता है। इससे आप वीडियो के Song, Text, Effects, transition आदि को आराम से अपनी पसंद के अनुसार डिजाइन कर सकते हैं।
ध्यान से editing करें: ध्यान से editing करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। एक अच्छे वीडियो एडिटर को हमेशा वीडियो के डिटेल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह editing में आपके वीडियो को अधिक व्यापक बनाने में मदद करता है।
अपनी वीडियो की गति को ध्यान में रखें: वीडियो editing के दौरान Speed बहुत महत्वपूर्ण होती है। इससे आपकी वीडियो का Timing और pace सही होता है। इससे विडियो की एडिटिंग काफी अच्छी होती है जिससे विडियो देखने में और भी अच्छा लगता है।

CONCLUSION

Video Editing क्या है इसको कैसे करते है? इसके बारे में आपलोग को अच्छे से जानकारी मिल गयी होगी। जिसमे बताया गया है क्या क्या क्वालिटी को मेन्टेन कर के हम एक अच्छा video editor बन सकते है। अगर ये पोस्ट अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों को जरुर शेयर करे। 

और कुछ भी इसके बारे में जानना है तो आपलोग हमें कमेंट कर के पूछ सकते है। 

धन्यवाद

ब्लूटूथ क्या है और ये किस तरह से काम करता है | BLUETOOTH TECHNOLOGY हिंदी में.

What is Bluetooth and how it is Work in Hindi

WHAT IS BLUETOOTH AND HOW IT IS WORK IN HINDI – ब्लूटूथ किस तरह से काम करता है?

Hello दोस्तों ! Techno Gyan लेकर आया है एक और नया टॉपिक जिसमे हमलोग जानेगे What is Bluetooth and how it is Work in Hindi के बारे में की Blutooth क्या है और ये किस तरह के काम करता है. तो चलिए आगे बढ़ते है और जानते है Bluetooth के बारे में.

Bluetooth एक वायरलेस तकनीक है जिसका इस्तेमाल विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बीच डेटा transfer करने के लिए किया जाता है। वायरलेस संचार के बाकी और साधनों की तुलना में डेटा ट्रांसमिशन की दूरी काफी कम रहती है। यह तकनीक केबलों, एडेप्टरों के उपयोग को खत्म कर  देती है और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को एक दूसरे के बीच वायरलेस तरीके से संचार करने की अनुमति देती है।

What is Bluetooth and how it is Work in Hindi

Image of Bluetooth in hindi

आम तौर पर, उपकरणों को तीन वर्गों में बाटा गया है: क्लास 1 सबसे शक्तिशाली है और 100 मीटर (330 फीट), क्लास 2 (सबसे सामान्य प्रकार) 10 मीटर (33 फीट) तक काम कर सकता है, और क्लास 3 हैं कम से कम शक्तिशाली और 1 मीटर (3.3 फीट) से अधिक नहीं।

BLUETOOTH TECHNOLOGY के FEATURES:

  • कम जटिलता
  • बिजली की कम खपत
  • सस्ती दरों पर उपलब्ध है
  • मजबूती

Bluetooth तकनीक से आने वाली वॉयस कॉल और फैक्स की क्षमता और पीडीए के automatic synchronization के लिए हाथों से मुक्त हेडसेट की अनुमति देती है। कहने का मतलब है की हमलोग mobile को बिना कान में लगाये ब्लूटूथ के द्वारा आसानी से बात कर सकते है.

ब्लूटूथ का वर्गीकरण

बाजारों में अनेको प्रकार की Bluetooth तकनीक उपलब्ध हैं जो उपभोक्ताओं को वायरलेस तरीके से बात करने में मदद करती हैं। विभिन्न प्रकार के Bluetooth डिवाइस जैसे पीसी कार्ड, रेडियो, डोंगल और हेडसेट हैं। लैपटॉप और अन्य इंटरनेट सक्षम उपकरण वायरलेस संचार के लिए Bluetooth तकनीक जैसे वायरलेस माउस और कीबोर्ड का उपयोग करते हैं।

आइपॉड, संगीत फोन या अन्य एमपी 3 प्लेयर जैसे म्यूजिक प्लेयर स्टीरियो हेडफ़ोन का उपयोग करते हैं।

USES OF BLUETOOTH – ब्लूटूथ का इस्तेमाल

  1. Bluetooth का सबसे बड़ा योगदान एक ऐसे हेडसेट के साथ फोन प्रदान करना है जो वायरलेस तरीके से काम करता है। यह कॉलर को एक इयरपीस और कॉलर की शर्ट से जुड़ा एक छोटा माइक्रोफोन प्रदान करके संभव है। मोबाइल फोन बैग में या शरीर में कहीं भी स्थित हो सकता है। कॉलर मोबाइल फोन पर एक बटन को छुए बिना भी एक नंबर डायल कर सकता है।

What is Bluetooth and how it is Work in Hindi

Image of Bluetooth in hindi
  1. पीडीए, पीसी या लैपटॉप जिसने Bluetooth को सक्षम किया है, एक दूसरे के साथ संवाद कर सकते हैं और इसकी नवीनतम जानकारी के साथ अपडेट कर सकते हैं। इस तकनीक ने डेटा को आसानी से सिंक्रनाइज़ करने में मदद की है।
  2. वायरलेस माउस और कीबोर्ड में इस्तेमाल किए जाते हैं।
  3. जब आपका लैपटॉप मेल प्राप्त करता है, तो उसके मोबाइल फोन पर अलर्ट किया जाएगा।
  4. आप लैपटॉप के माध्यम से एक प्रिंटर का पता लगाने की कोशिश कर सकते हैं। एक बार प्रिंटर के स्थित होने पर आपको उस दस्तावेज़ का प्रिंटआउट मिल जाएगा।

जरुर पढ़े :

HOW TO WORK BLUETOOTH – ब्लूटूथ का कार्य

Bluetooth 2.45 गीगाहर्ट्ज़ पर केंद्रित 79 अलग-अलग आवृत्तियों (चैनलों) के एक बैंड में रेडियो तरंगों को भेजता है और प्राप्त करता है, रेडियो, टेलीविजन और सेलफोन से अलग, और औद्योगिक, वैज्ञानिक और चिकित्सा उपकरणों द्वारा उपयोग के लिए आरक्षित है।

चिंता न करें: आप अपने घर में Bluetooth का उपयोग करके किसी की life support machine के साथ हस्तक्षेप नहीं करने जा रहे हैं, क्योंकि आपके ट्रांसमीटरों की low power आपके संकेतों को दूर नहीं ले जाएगी! Bluetooth की कम दूरी के ट्रांसमीटर इसके सबसे बड़े प्लस पॉइंट्स में से एक हैं।

वे वस्तुतः कोई शक्ति का उपयोग करते हैं और, क्योंकि वे बहुत दूर तक यात्रा नहीं करते हैं, सैद्धांतिक रूप से वायरलेस नेटवर्क की तुलना में अधिक सुरक्षित हैं जो लंबी दूरी पर संचालित होते हैं, जैसे कि वाई-फाई।

What is Bluetooth and how it is Work in Hindi

Image of Bluetooth in hindi

Bluetooth डिवाइस स्वचालित रूप से पता लगाते हैं और एक दूसरे से कनेक्ट होते हैं. वे एक दूसरे के साथ हस्तक्षेप नहीं करते हैं क्योंकि प्रत्येक जोड़ी डिवाइस 79 उपलब्ध चैनलों में से एक अलग का उपयोग करता है। यदि दो डिवाइस बात करना चाहते हैं, तो वे बेतरतीब ढंग से एक चैनल चुनते हैं.

और, अगर वह पहले से ही लिया गया है, तो बेतरतीब ढंग से दूसरों में से एक पर स्विच करें (एक तकनीक जिसे स्प्रेड-स्पेक्ट्रम फ़्रीक्वेंसी होपिंग के रूप में जाना जाता है)। अन्य बिजली के उपकरणों (और सुरक्षा में सुधार के लिए) से हस्तक्षेप के जोखिमों को कम करने के लिए, उपकरणों के जोड़े लगातार आवृत्ति का उपयोग करते हैं, जो एक सेकंड में हजारों बार होता है। आप पढ़ रहे है What is Bluetooth and how it is Work.

जब दो या अधिक Bluetooth डिवाइसों का एक समूह एक साथ जानकारी साझा कर रहा होता है, तो वे एक तरह का Ad-hoc, मिनी कंप्यूटर नेटवर्क बनाते हैं, जिसे एक Piconet कहा जाता है। अन्य उपकरण किसी भी समय किसी मौजूदा पिनकनेक्ट में शामिल हो सकते हैं या छोड़ सकते हैं।

एक उपकरण (मास्टर के रूप में जाना जाता है) नेटवर्क के समग्र नियंत्रक के रूप में कार्य करता है, जबकि अन्य (दास के रूप में जाना जाता है) इसके निर्देशों का पालन करते हैं। दो या दो से अधिक अलग-अलग पिंकसेट भी जुड़ सकते हैं और सूचनाओं को साझा कर सकते हैं, जिसे Scatternet कहा जाता है।

ब्लूटूथ का इतिहास – HISTORY OF BLUETOOTH

1994 में स्वीडिश कंपनी एरिक्सन के लिए काम करने वाले वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा Bluetooth वायरलेस टेक्नोलॉजी का आविष्कार किया गया था। चार साल बाद, कंपनियों के एक पूरे समूह ने अपने स्वयं के प्रोजेक्ट को बढ़ाने और उन उत्पादों को बेहतर संवाद करने में मदद करने के लिए प्रौद्योगिकी को साझा करना शुरू किया।

BLUETOOTH का नाम कैसे पड़ा ? – HOW BLUETOOTH GOT ITS NAME?

ब्लूटूथ का आविष्कार technology के लिए काफी अहम् माना जाता है। जब सन 1996 में अलग अलग वायरलेस technology पर खोज चल रहा था। तब की बात है उस समय कोई भी ऐसा standard नहीं था। और उस समय एक ऐसा standard की जरुरत थी। जिससे device आपस में pair कर सके।

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उसी समय की बात है एक साइंटिस्ट थे। जिम कार्दच जो इंटेल के लिए काम कर रहे थे। उस समय इंटेल, नोकिया और एर्रिक्सन ये सब वायरलेस technology पर काम कर रहे थे। 

इसी समय में साइंटिस्ट जिम कार्दच एक बुक पढ़ रहे थे। जिस किताब में राजा हेराल्ड ब्लूटूथ की बारे में बताया गया था। जो 10 वी शताब्दी के राजा हुआ करते थे। और ये कहानी जिम को काफी पसंद आ गयी। उसी समय वायरलेस पर काम भी चल रहा था। तो उस समय ये निष्कर्ष निकला की जबतक कोई और नाम नहीं आ जाता है। तब तक इस वायरलेस technology का नाम ब्लूटूथ ही रख दिया जाये।  

तो इस तरह से ब्लूटूथ का नाम 10 वी शताब्दी के राजा के नाम पर पड़ गयी। और ब्लूटूथ का लोगो भी इसी हेराल्ड ब्लूटूथ के नाम पर बनाया गया है।

क्या ब्लूटूथ सुरक्षित है?

वायरलेस हमेशा वायर्ड संचार की तुलना में कम सुरक्षित होता है। याद रखें कि पुरानी जासूसी फ़िल्में लोगों की बातचीत को पलटने के लिए गुप्त एजेंटों को टेलीफोन के तारों में tapping  दिखाती थीं? नहीं दिखाती थी कहने का अर्थ है की वायर्ड technology secure माना जाता है.

क्रैकिंग वायर्ड संचार में काफी  कठिन है। वायरलेस पर एवरसड्रॉपिंग जाहिर तौर पर बहुत आसान है क्योंकि खुली हवा के माध्यम से जानकारी आगे-पीछे होती रहती है। आपको बस इसके संकेतों को लेने के लिए एक वायरलेस ट्रांसमीटर की सीमा में होना चाहिए।

इस समस्या को हल करने के लिए वायरलेस इंटरनेट नेटवर्क को एन्क्रिप्ट किया गया है. कोई भी आपके data को या information को आसानी से चोरी नहीं कर सकता है.

CONCLUSION

दोस्तों आपने इस ब्लॉग में What is Bluetooth and how it is Work के बारे में जाना. जिसमे बताया गया है की ये technology किस तरह से काम करती है. और इसके रहने से हमारे दैनिक जीवन में कितने लाभ है. इसके साथ साथ इसके use करने के बारे में भी जाना.

दोस्तों उम्मीद करता हु आपलोगो को ये ब्लॉग से आपलोग को काफी कुछ जानने को मिला होगा. अगर अच्छा लगा हो तो कृपया कमेंट करे और अगर कुछ कमी हो तो उसको भी बताये. इससे Related और कोई प्रश्न है तो हमें बताये मैं उसका Answer जरूर दूंगा जिससे आपलोग उसके बारे में और जानने को मिल सके.

आप को Tech से Related जो भी Questions है आप मुझसे पूछ सकते है या अपने बातो को शेयर कर सकते है.तो कृपया कमेंट करे.

Thank You

 

 

ADVANCED GUIDE TO WHAT IS MINI USB AND MICRO USB IN HINDI

what is mini usb and micro usb in hindi

WHAT IS MINI USB AND MICRO USB IN HINDI

USB का फुल फॉर्म Universal Serial Bus होता है. आज हमलोग सीखेंगे की What is mini USB and micro USB in Hindi. असल में USB एक कनेक्टर, cables या communication के लिए use में लाये जाते है.

जो की हमारे computers और तरह तरह के इलेक्ट्रॉनिक्स devices को communicate करने में हेल्प करता है. Technology के हिसाब से आज के डेट में काफी न्यू types आ गए है हमारे USB के. जिसमे काफी एडवांस feature होते है. जैसे की mini USB, micro USB इत्यादि.

MINI USB AND MICRO USB

Mini USB

what is mini usb and micro usb in hindi

image of what is mini USB and micro USB

ये USB एक standard कनेक्टर होते थे जो मोबाइल में use किया जाता था. उस टाइम micro USB नहीं हुआ करते थे. इसका use generally मोबाइल और PDA में हुआ करता था. इस USB में OTG का सपोर्ट नहीं हुआ करता था. इनका size काफी छोटा हुआ करता था रेगुलर USB की तुलना में.

इस USB को अभी भी बहुत से कैमरा में use किया जाता है.इसका connect disconnect cycle 5000 टाइम होता है जो micro से काम होते है. mini USB का use मोस्टली डाटा ट्रान्सफर और स्टोरिंग के लिए किया जाता था.

Micro USB

what is mini usb and micro usb in hindi

image of what is mini USB and micro USB

इसको मार्किट में साल 2007 में लाया गया. ये mini USB को replace कर दिया micro USB से. इसका connect और disconnect cycle mini की तुलना में 10000 गुना ज्यादा था. जिससे ये लॉन्ग टाइम use किया जा सकता था. इसका use आज के टाइम में लगभग सारे devices में किया जा रहा है सिर्फ apple को छोड़ कर.

और इसका use एक standered के तौर पर किया जा रहा है. इसमें हम OTG का use कर सकते है. इसका use हम डाटा ट्रान्सफर और store में तो करते ही है साथ में चार्जिंग का भी काम करता है. micro USB का size mini की तुलना में कम होते है.

एक कारण यही था की micro USB को इतना priority मिली. इसका use एक प्राइमरी USB केबल के तौर पर मोबाइल में किया गया. क्योकि इससे डाटा तो ट्रान्सफर होते ही थे साथ में चार्जिंग भी होती थी.

DIFFERENCE BETWEEN MINI USB AND MICRO USB

MINI USBMICRO USB
5000 cycle10000 cycle
काम durable होते हैज्यादा durable होते है
डाटा ट्रान्सफर और स्टोरेज में use होता हैडाटा के साथ साथ चार्जिंग भी कर सकता है
OTG सपोर्ट नहीं करतेOTG सपोर्ट करते है
मोबाइल फ्रेंडली नहीं होते थेमोबाइल फ्रेंडली होते है
3×7 mm size (approx)6.85×1.8 mm size (approx)

TYPES OF USB

  • Type-A
  • Type-B
  • Type-C

Type A – सबसे ज्यादा popular इस्तेमाल में होने वाला USB type A होता है. जो की केबल के एक सिरा पर लगा होता है. ये host devices में आपको देखने को मिल जायेगा. जैसे लैपटॉप, कंप्यूटर या गेमिंग PC. बहुत से devices में इसका use सिर्फ डाटा ट्रान्सफर करने और चार्जिंग के लिए use होता है.

Type B – ये केबल देखने में square connector जैसा होता है. इसका use पुराने printer या अलग अलग तरह के peripheral devices में होता है. जिसको की कंप्यूटर के साथ कनेक्ट किया जाता है. इसका use काफी कम होता है type A की तुलना में. इसका use commonly नहीं किया जाता है.

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Type C – Type-C एक न्यू interface है जो Type-A और Type-B के बाद साल 2014 में launch किया गया था. ये type बाकी के दोनों से काफी एडवांस feature के साथ आता है. ये reversible होता है. कहने के मतलब है की इसको हम जैसे चाहे वैसे कनेक्ट कर सकते है. ये आजकल हमारे PC, laptop या smartphone में देखने को मिल जायेगा.

इसके जरिये हम 100 Watt तक power को ट्रान्सफर कर सकते है. Type C का ट्रान्सफर speed 10 gbps तक होता है जो की बाकी के दोनों types से काफी ज्यादा होता है. ये ज्यादा popular इसलिए हुआ क्योकि इसमें 24 पिन होते है जो double side connection के साथ आते है.

इसका एक खासियेत ये भी है की इस केबल से हम काफी जल्दी अपने मोबाइल को charge भी कर लेते है.  और ये केबल मार्किट में एक standard के तौर पर आगे आ रहा है. क्योकि आने वाले टाइम में इसी केबल का use ज्यादा होने वाला है.

TYPES OF USB VERSIONS

USB 1.0

इस USB को साल 1996 में लाया गया था. जिसमे इसका ट्रान्सफर speed 1.5 एमबीपीएस थी. जो आज की तुलना में काफी slow speed माना जाता है. ज्यादातर जो इस टाइप के USB होते थे वो white कलर में आते थे.

USB 1.1

इसको साल 1998 में आया था. जिसका ट्रान्सफर speed 12 एमबीपीएस होता था और इसको 1.0 से थोडा improve किया गया था. जिससे speed अच्छी मिल सके. इसको full speed USB के नाम से भी जाना जाता था. इसका एक खासियत था जिसमे ये दो अलग अलग speed पर भी वर्क कर सकता था. जैसे low bandwidth 1.5 एमबीपीएस और full speed 12 एमबीपीएस.

USB 2.0

ये साल 2000 में launch किया गया था और ये आज के डेट में भी use किया जा रहा है. इसका speed बाकी के दोनों से अच्छा था. इसमें 480 एमबीपीएस तक का ट्रान्सफर speed होते है. ये ज्यादातर आपको काले रंग में मिलते है. इसमें डाटा ट्रान्सफर only सिंगल way में होते है.  इसका केबल का size maximum 16’5” होता है. जो बाकी के केबल से काफी बड़ा होता है.

ये 5 V और 1.8 A पर काम करता है. इसका use हमलोग normal PC में डाटा ट्रान्सफर करने या और भी बहुत कामो के लिए करते है. इसमें 4 कॉपर के वायर लगे होते है जिसके हेल्प से डाटा ट्रान्सफर होते है.

USB 3.0

USB 3.0 को साल 2008 में मार्किट में लाया गया था. जिसमे काफी 2.0 की तुलना में काफी सारे features थे. इसमें डाटा का ट्रान्सफर super speed mode में होता था. जिसका ट्रान्सफर speed 5 gbps है. इसमें डाटा का ट्रान्सफर दोनों डायरेक्शन में होने वाला features है. जिसके कारण speed काफी बढ़ जाता है. ये ज्यदातर ब्लू कलर में मिलते है जिससे समझने में काफी आसानी हो जाता है.

what is mini usb and micro usb in hindi

image of what is mini USB and micro USB

इसमें भी power operate करने की छमता same USB 2.0 के जितना ही होते है, 5 V और 1.8 A. इसका maximum केबल size 9’10” होते है जो USB 2.0 की तुलना में थोडा कम होते है. इसको use करने में एक बात का ध्यान देना जरुरी है. अगर आपके PC में USB 2.0 का पोर्ट है तो फिर आपको speed 2.0(480 एमबीपीएस) के जितना ही मिलेगा. आप पढ़ रहे है What is mini USB and micro USB in Hindi. 

इसके हेल्प से हमलोग बड़े से बड़े डाटा को काफी ही आसानी से कम टाइम में ट्रान्सफर कर लेते है.

USB 3.1

ये मार्किट में साल 2013 में लाया गया था. ये 3.0 से भी एडवांस है क्योकि इसका ट्रान्सफर speed 10 gbps होते है. जो की बाकी के सारे वर्शन से काफी ज्यादा होता है. और ये हमारे 2.0 और 3.0 दोनों के साथ easily compatible होते है. ये भी दोनों डायरेक्शन में डाटा को ट्रान्सफर करता है.

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ये USB 20 V और 5 A पर काम करता है जो की बाकी की तुलना में काफी ज्यादा होते है. इसके साथ भी same प्रॉब्लम है. अगर हम ओल्ड वर्शन वाले USB में कनेक्ट करते है तो इसका speed ओल्ड वाले के हिसाब से ही मिलता है. इसमें 9 कॉपर के वायर होते है.

USB में OTG क्या होता है ?

OTG का पूरा नाम “On The Go” होता है. आज कल जितने भी मोबाइल या लैपटॉप आ रहे है सब OTG को सपोर्ट करते है. तो ऐसे में जिस भी device में ये feature होते है उससे आप अपने pendrive को easily कनेक्ट कर सकते है. जैसे आजकल हमलोग डायरेक्ट pendrive को मोबाइल के साथ कनेक्ट कर के काफी आसानी से डाटा का exchange कर सकते है.

इससे क्या होता है की आपको अपने मोबाइल को कंप्यूटर से कनेक्ट करने की जरुरत नहीं पड़ती. काफी आसानी से हम अपने pendrive के डाटा access कर सकते है.

तो इसका कुछ मुख्य कार्य मै आपको निचे बता रहा हु :

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  1. इसका सबसे बड़ा बात ये है की हमलोग इसके हेल्प से कीबोर्ड और माउस को कनेक्ट कर सकते है. और आसानी से बिना स्क्रीन को छुए हम टाइपिंग कर सकते है. और अपनी टाइपिंग स्किल को बिना कंप्यूटर के improve कर सकते है.
  2. मेमोरी card को कनेक्ट कर के हम गाने या मूवी भेज सकते है.
  3. आजकल ऐसे भी मोबाइल आ रहे है जिसमे हम OTG के हेल्प से HDD को भी access कर सकते है.
  4. USB लाइट को ऐड कर सकते है और कोई video शूट करते टाइम इसका use कर सकते है.
  5. आज कल ऐसे भी मोबाइल आते है जिससे दुसरे के मोबाइल को charge भी किया जा सकता है. अगर ये feature है तो उसको भी आपलोग OTG की मदद से use कर सकते है.
  6. DSLR camera को कनेक्ट कर के आसानी से अपने मोबाइल से operate कर सकते है.

USB TROUBLESHOOT

आपलोग जानते ही होंगे की कोई भी टेक्निकल चीज है तो वो जरुरी नहीं की हमेशा अच्छे काम करे ही. तो ऐसे ही हमारे USB devices के साथ भी हो सकते है. कभी कभी क्या होता है की USB use करते टाइम अचानक से काम नहीं करना, या PC में कनेक्ट करने के बाद डिटेक्ट न करना. तो इस तरह के प्रॉब्लम को हम किस तरह से troubleshoot करते है वो देखते है.

जब इस तरह से प्रॉब्लम आये तो कुछ पॉइंट्स को चेक कर सकते है जो निम्न है :

  1. PC या मोबाइल को रीस्टार्ट कर ले
  2. किसी दूसरी PC में USB लगा कर चेक करे
  3. एक बार जहा भी USB लगा रहे है उस पोर्ट को अच्छे से चेक कर ले कही डैमेज तो नहीं है
  4. USB के ड्राईवर को हो सके तो update कर ले क्योकि इसके वजह से भी कभी कभी काम नहीं करता
  5. इसके केबल को भी अच्छे से चेक कर ले

USAGES OF USB

  1. इसके हेल्प से हम अपने मोबाइल को PC से कनेक्ट कर डाटा ट्रान्सफर कर सकते है
  2. इसकी हेल्प से हम power बैंक से अपनी मोबाइल को charge कर सकते है
  3. इसकी वजह से काफी पोर्टेबिलिटी आ गयी जिस वजह से हम कही भी कुछ भी इसकी हेल्प से connect या disconnect कर सकते है
  4. मोबाइल से PC कनेक्ट कर प्रिंट कर सकते है

CONCLUSION

मुझे पूरा भरोसा है की आपलोग यहाँ What is mini USB and micro USB के बारे में अच्छे से समझा होगा. क्योकि मैंने यहाँ काफी सिंपल लैंग्वेज में आपको समझाने की कोशिस किया हूँ. जिससे आपलोग को USB से रिलेटेड सारे डाउट clear हो जायेंगे.

अगर आपको अच्छा लगा हो तो इसको अपने दोस्तों या करीबी के साथ जरुर शेयर करे. जिससे उनको भी इस तरह की इनफार्मेशन मिल सके और वो भी अपनी स्किल को बढ़ा सके. इसमें मै सिंपल हिंदी में समझाया हूँ अगर किसी को प्रॉब्लम लगे तो हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट कर के बताये.

मै उनका answer जरुर दूंगा आपका डाउट clear करूंगा. आपलोग हमें mail भी कर सकते है. 

Thanks

BAR CODE TECHNOLOGY क्या है ? | ये कैसे काम करता है ?

What is Bar Code Technology in Hindi

What is Bar Code Technology in Hindi. Hello Friends! Techno Gyan में आपका स्वागत करता हु एक और नए ब्लॉग में। आज हम बात करेंगे Bar Code के बारे, की Bar Code Technology क्या होता है और इसका इस्तेमाल हम कैसे करते है।

आप जब Shopping Mall में गए होंगे या किसी बड़े Shop में गए होंगे और आपने ऐसा प्रोडक्ट ख़रीदा होगा जिसके Back Side में कुछ Lines बनी होंगी काले रंग की तो हमारे मन में सवाल आता है की आखिर ये क्या है। फिर जब हम Cash Counter पर जाते है तब Cash Counter वाले हमारे उस प्रोडक्ट को लेकर एक device से Scan करते है और स्कैन होते ही उस प्रोडक्ट का price उसके कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखने लगता है. कहने का मतलब हुआ की उस प्रोडक्ट का बिल generate हो जाता है.

तो friends आज मै इस टॉपिक में यही सब cover करने वाला हूँ. तो चलिए आगे बढ़ते है और इस ब्लॉग में सिखते है की What is Bar Code Technology in Hindi में।

तो बने रहिये हमारे साथ और नए नए Tech से Related जानकारी लेते रहिये।

WHAT IS BAR CODE TECHNOLOGY – BAR CODE क्या है ?

अगर हम Bar Code के defination की बात करे तो ये एक machine Readable Code होता है जो number के Format में रहता है और ये Parallel Line में अलग अलग प्रोडक्ट पर दिए हुए रहता है। इसके use से कोई भी Company बड़ी ही आसानी से उस प्रोडक्ट के Price और Stock Level को Track कर पाती है।

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इसके use से कंपनिया अपने Efficiency को बढ़ा सकती है क्योकि ये लोग इसी के जरिये सबकुछ track करती रहती है. इस Line को देख कर हम भी सोचते रहते है की आखिर ये किसलिए होता है. तो ये लाइन बड़े ही काम की लाइन साबित होती है कंपनियों के लिए.

जिसको हमलोग किसी भी Bar Code Scanner की हेल्प से Scan कर सकते है, और उस प्रोडक्ट पर दिया Data को बड़े ही आसानी से Computer में Feed कर सकते है।

HISTORY

इस तकनीक को दो लोग मिलकर develop किये थे. जो की दोनों एक स्टूडेंट्स थे जिनमे एक थे Bernard Silver और दुसरे Norman Josheph Woodland थे. ये दोनों Pennsylvania University के स्टूडेंट्स थे. इस टेक्नोलॉजी को 1948 में develop कर लिया गया था. इसको 1 D Bar Code के नाम से भी जाना जाता था.

इस bar code technology का ख्याल सबसे पहले Bernard को आया था. जो कही लोकल फ़ूड स्टोर के लाइन को देखा की उसमे Automatically प्रोडक्ट की जानकारी लेने में प्रॉब्लम हो रही है. क्यों न ऐसा कुछ बनाया जाये जिसके हेल्प से अपने आप पता चल जाये की प्रोडक्ट और कितना बचा हुआ है.

next कुछ सालों के बाद बहुत सारे रिसर्च करने के बाद ये दोस्तों ने इस Bar Code को develop कर लिया. ये मार्किट में प्रोडक्ट के चेक आउट process को काफी fast बना दिया और वो भी काफी accuracy के साथ.

हालांकि Technology से काफी  सहायता मिली थी, लेकिन इसकी अपनी कुछ Limitation थीं।

जब ये लोग Bar Code को develop कर लिए तो उसमे कुछ limitation थे, जिनको दूर करने के लिए 2 D Bar Code technology को develop किया गया. इसमें सबसे पहला 2 D Bar Code 1987 में Devid Alayas द्वारा बनाया गया था.

2 D Bar Code technology, 1 D Bar Code technology से काफी अच्छी थी क्योकि इसमें ज्यादा से ज्यादा डाटा store करने की capacity था. टाइम के साथ और भी 2 D Bar Code technology जैसे एज़्टेक कोड, डेटा मैट्रिक्स और क्यूड develop किये गए थे.

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TYPES OF BAR CODE

जब बार Code मार्किट में आया था तब ये Dimension में ही था जिसमे सिर्फ Lines ही थी लेकिन आजकल काफी फॉर्मेट में मार्किट में आ गयी है जिसको हमलोग Mobile से भी Scan कर के उसके बारे में पता कर सकते है।

BAR CODE BASICALLY TWO टाइप्स के होते है:

  1. 1 D
  2. 2 D

1 DIMENSIONAL :

ये तकनीक 1 D UPC(Universal Product Code) के उपर कार्य करता है जिसको की दो पार्ट में divide किया गया है. जिसमे पहला वाला Bar Code होता है और दूसरा वाला 12 Digit UPC नंबर. इसमें first 6 डिजिट Manufacturer Identification नंबर होता है और बाकी का 5 डिजिट आइटम नंबर को show करता है. और इसी में लास्ट डिजिट स्कैनर को ये बताने का काम करता है की स्कैनिंग सही से हुआ है या नहीं. ये स्कैनर सिर्फ text को ही स्कैन कर सकता है.

2 DIMENSIONAL :

इस 2 D या 2 डायमेंशनल technology में text के साथ साथ और भी बहुत जानकारी को स्कैन करता है. जैसे की यूआरएल, प्रोडक्ट price या image इत्यादि. 1 D वाले स्कैनर से हम 2 D वाले code स्कैन नहीं कर सकते है. इस तरह के code को हमलोग लेटेस्ट मोबाइल के कैमरा से भी स्कैन कर सकते है.

बार कोड काम कैसे करता है? | HOW TO WORK BAR CODE

आइये अब जानते है की बार code वर्क किस तरह से करता है? इस बार code में हर एक नंबर का लाइन कैसा रहेगा और ये कितना पतला या मोटा रहेगा ये पहले से define किया रहता है. जब स्कैनर का लेज़र लाइट इस लाइन पर पड़ता है तो वो लाइट उजला लाइन से रिफ्लेक्ट होकर receiver को सुचना send करता है.

जिससे receiver 0,1 का sequence बनाता है और उसको seven segment में divide करके ये पता लगाता है की कौन सा नंबर है. इस तरह से bar code scanner डाटा को स्कैन कर के कंप्यूटर डिस्प्ले तक डाटा पहुचाता है.

बार कोड का इस्तेमाल:

  • Bar Code का सबसे ज्यादा इस्तेमाल Mall, Groccery Shop, Post Office में Speed Post के लिए
  • Medical Line में
  • आज कल स्कूल और होटल में भी Check In और Check Out में use होता है
  • Electronic Record Storage और Retrival में
  • Driving licence और Coupons में
  • Consumer Retail Goods में

QR(QUICK RESPONSE) CODE:

What is Bar Code Technology in Hindi

QR code एक square शेप में बहुत से Dot Dot और अजीबो टाइप के Symbol से बना होता है ये Basically Ticket के उपर Online Website पर और Visiting Card के उपर बना होता है. इस Code का Use Information को Share करने के लिए होता है।

QR Code में ज्यादा Information Store होता है और इसमें Error को ठीक भी किया जा सकता है जैसे अगर आपका QR Code थोडा कट भी जायेगा तो उसको हम आसानी से Recover कर सकते है।

अगर इस कोड में ज्यादा Information Store होता है तो बेसक इसका डिजाईन भी काफी Tough होगा. इस कोड में 3 Block बने होते है जो 3 Square शेप में रहते है।

BAR CODE से रिलेटेड FAQs 

#1 Bar code में मुख्या रूप से क्या store होता है?

इसमें प्रोडक्ट से रिलेटेड इनफार्मेशन को store किया जाता है. जिसमे मोबाइल नंबर, email या फिर address भी store रह सकता है.

#2 प्रोडक्ट में बार code का क्या कार्य होता है?

बार code होने से उस प्रोडक्ट के बारे में हमें सारी जानकारी मिल जाती है. जैसे की वो प्रोडक्ट अभी stock में कितने है. या फिर कही कोई price में up down आते है तो आटोमेटिक update हो जाते है. तो इस तरह से काफी काम का होता है एक बार कोड.

#3 Bar code का full form क्या होता है?

इसका full form bar code ही होता है?

#4 अपना खुद का Bar code कैसे बना सकते है?

Bar code बनाने के लिए google में जाये. इसमें Barcode Generator सर्च करे. उसके बाद कोई भी एक वेबसाइट ओपन करे. फिर उसमे barcode के टाइप को select करे. और जिस नाम से barcode बनाना है वो नाम लिख कर barcode generator टूल पर क्लिक करे. आपका barcode बन जायेगा.

#5 QR Code का full form क्या है?

Quick response code होता है.

CONCLUSION

तो Friends मैं आशा करता हु की आपलोगो को ये ब्लॉग अच्छा लगा होगा अगर अच्छा लगा तो कृपया कमेंट करे. और अगर कुछ कमी हो तो उसको भी बताये. इससे Related और कोई प्रश्न है तो हमें बताये मैं उसका Answer जरूर दूंगा जिससे आपलोग उसके बारे में और जान सके. 

आप को Tech से Related जो भी Questions है आप मुझसे question कर सकते है या अपने बातो को हमारे blog के जरिये शेयर कर सकते है. तो कृपया कमेंट जरुर करे या हमें Mail करे.

 

Thank You

 

HOW TO CREATE A WiFi HOTSPOT IN WINDOWS 7 IN LAPTOP IN HINDI | BEST TIPS

How to Create a WiFi Hotspot in Windows 7 in Laptop

How to Create a WiFi Hotspot in Windows 7 in Laptop in Hindi. Hello दोस्तों नमस्कार!! कैसे है ? आज मै आपलोग के लिए एक नया टॉपिक लेकर आया हूँ. जिसमे हमलोग बात करेंगे की किसी भी laptop को WiFi Hotspot की तरह कैसे इस्तेमाल करे और configuration कैसे करेंगे तो बने रहिये और नए नए टेक से जुड़े जानकारी लेते रहे.

HOW TO CREATE A WiFi HOTSPOT IN WINDOWS 7 IN LAPTOP – किसी भी लैपटॉप को WiFi हॉटस्पॉट की तरह कैसे USE करे.

जरुरी नहीं की सबलोग के पास router रहे अगर router रहेगा तो फिर कोई भी आसानी से उस router से WiFi Hotspot के तरह इस्तेमाल कर सकते है. अगर आपके पास router नहीं है और आपको एक से ज्यादा device में इन्टरनेट share करना है तो उसके लिए मैं एक tips लेकर आया हु.

जिससे आप बिना router के अपने laptop को WiFi Hotspot के तरह बना सकते है जिससे हमारा laptop या smartphone आसानी से connect हो सकता है. तो आइये कुछ steps को follow करके सिखते है की कैसे एक laptop को WiFi Hotspot की तरह इस्तेमाल कर सकते है. How to Create a WiFi Hotspot in Windows 7 in Laptop in Hindi.

ये भी पढ़े:

SOFTWARE का इस्तेमाल करके :

हम अपने laptop या computer को एक software का इस्तेमाल करके WiFi Hotspot की तरह इस्तेमाल कर सकते है उसके लिए mHotspot software डाउनलोड करले फिर उसको अपने laptop में install करे. Install करने के बाद उसको open करे. open करने के बाद कुछ इस तरह से दिखेगा जैसा की निचे फोटो में दिखाया गया है. अब हमें इस software में कुछ configuration करना होगा जैसे :

  • Hotspot Name में WiFi का नाम देना है.
  • Password में WiFi का password देना है.
  • Internet Source में चुनना है की किस Source से हमें इन्टरनेट चलाना है.
  • Max Clients का मतलब है की कितने device को अपने laptop से connect करना है.

ये सब सेटिंग होने के बाद Start Hotspot पर click करेंगे जिससे WiFi शुरु हो जायेगा. और हम WiFi Hotspot use कर पाएंगे.

How to Create a WiFi Hotspot in Windows 7 in Laptop
Image of How to Create a WiFi Hotspot in Windows 7 in Laptop

HOW TO CREATE A WiFi HOTSPOT IN WINDOWS 7 IN LAPTOP

COMMAND PROMPT का इस्तेमाल करके:

हमलोग एक दुसरे तरीका से भी laptop को WiFi Hotspot की तरह इस्तेमाल कर सकते है और वो तरीका है command prompt. उसके लिए निम्न तरीका का इस्तेमाल करते है :

सबसे पहले हम command prompt open करेंगे फिर उसमे कुछ command का use करके अपने WiFi Hotspot को activate कर सकते है. जैसा की command निचे दिया गया है.

C:\Users\pc1>netsh wlan show drivers

C:\Users\pc1>netsh wlan set hostednetwork mode=allow ssid=wifi_name key=password

C:\Users\ pc1>netsh wlan start hostednetwork

Note : उपर के command में WiFi_name के जगह पर अपना WiFi name use कर सकते है और password के जगह पर अपना password use कर सकते है. और last वाला command लिखने के बाद कुछ समय बाद आपका WiFi Hotspot activate हो जायेगा.

ये command लिखने के बाद हमें अपने laptop में कुछ सेटिंग करना पड़ेगा तभी हम hotspot का use कर पाएंगे. उसके लिए निम्न सेटिंग करेंगे :

click start button > control panel > network and sharing center

network and sharing center में जाने के बाद next step follow करेंगे.

जरुर पढ़े :

How to Create a WiFi Hotspot in Windows 7 in Laptop
Image of How to Create a WiFi Hotspot in Windows 7 in Laptop

Wireless Network Connection 2 पर click करेंगे उसके बाद निचे दिए गए फोटो के हिसाब से step follow करेंगे.

How to Create a WiFi Hotspot in Windows 7 in Laptop
Image of How to Create a WiFi Hotspot in Windows 7 in Laptop

properties पर click करेंगे जिससे नया window open होगा उसमे Sharing tab पर click करेंगे और checkbox को allow करेंगे उसके बाद finally ok button पर click करेंगे. अब हम अपने laptop को WiFi Hotspot की तरह use कर सकते है.

CONCLUSION

इसमें आपने देखा की How to Create a WiFi Hotspot in Windows 7 in Laptop. किस तरह से हम अपने किसी भी लैपटॉप को बड़ी ही आसानी से WiFi Hotspot की तरह बना कर use कर सकते है.

तो दोस्तों इस तरह से आप अपने computer या laptop को WiFi Hotspot की तरह इस्तेमाल कर सकते है और अपने smartphone को भी laptop से connect करके use कर सकते है. आपको ये ब्लॉग कैसा लगा हमें जरुर बताये और अपने दोस्तों के साथ share करे जिससे हमारी पोस्ट और भी लोगो तक पहुच सके और वो भी ये trick use कर सके.

अगर आपको इसमें कुछ और improvement लगता है तो वो हमें comment करके बताये. जिससे मैं अपने पोस्ट के content को और भी अच्छे से आपके सामने ला सकू.

Thank You !!!

ONLINE CLASSES ADVANTAGES AND DISADVANTAGES IN HINDI (2026)

online classes advantage and disadvantage

Online Classes Advantages and Disadvantages in Hindi के बारे में मै आपलोग को बताऊंगा। जब से दुनिया में कोरोना नाम की बीमारी आई है। तब से सभी जगह पर online classes के काफी प्रचलन बढ़ गया है। सभी स्कूल और इंस्टिट्यूट ऑफलाइन से ऑनलाइन mode पर शिफ्ट हो गए है। 

अगर ये online mode पर शिफ्ट नहीं होता तो, आपलोग सोच सकते है हमारे न्यू generation के जो बच्चे है उनका कितना नुकसान होता। सबलोग online क्लास करने के लिए मजबूर हो गए। हालाँकि काफी प्रॉब्लम देखने को मिला था शुरू के कुछ दिनों में। क्योकि हमारे India में उतने लोग नहीं थे जो internet के बारे में भी जानते थे।

लेकिन इस महामारी में सबको इसके प्रति जागरूक कर दिया। ये एक तरह से अच्छा भी हुआ। जिससे लोग internet को जाना और अपने आप को online mode पर शिफ्ट किया। जब अचानक से लोग online mode पर शिफ्ट हुए तो उसमे काफी लोगो को प्रॉब्लम फेस करना पड़ा।

और काफी लोगो को इससे फायदा भी हुआ। तो आज के इस पोस्ट में मै आपलोग को Online Classes Advantages and Disadvantages के बारे में बताने जा रहा हूँ। जिससे आपलोग को ये पता चलेगा की हमें क्या क्या फायदा और नुकसान होता है online classes करने में। 

ONLINE CLASSES ADVANTAGES AND DISADVANTAGES IN HINDI | ONLINE CLASSES के ADVANTAGES और DISADVANTAGES के बारे में जाने.

आज के समय में किसी को भी अगर कुछ पढना है या सीखना है। तो ऐसे में उस person को अब physically कही जाने का जरूरत नहीं है। क्योकि आज के समय में technology काफी develop हो चूका है। जिसमे हमलोग वेबसाइट, एप्लीकेशन या सोशल मीडिया प्लेटफार्म का use कर के कही से भी online पढाई कर सकते है। 

अब बात करते है जब हमलोग online प्लेटफार्म का use अपने पढाई करने के लिए करते है। तो ऐसे में हमें कुछ challenge भी फेस करने पड़ते है। जिसके बारे में मै आपलोग को डिटेल में बताने जा रहा हूँ। सभी लोग जानते है की साइंस के कुछ फायदे है तो कुछ नुकसान भी है। 

तो आइये निचे देखते है Online Classes Advantages and Disadvantages के बारे में। 

ONLINE CLASSES ADVANTAGES के बारे में जाने

online classes advantage and disadvantage

#1. ONLINE CLASSES सुविधाजनक है

सही बात है online क्लास काफी सुविधाजनक है। क्योकि ये आप अपने मन के हिसाब से टाइम को manage कर सकते है। मान लीजिये आप कही से ट्रेवल कर के आये। और आपको क्लास करने है तो ऐसे में obvious सी बात है। की आपको कही भी जाकर पढने का मन नहीं करेगा। क्योकि आप उस समय काफी tired हो चुके है।

इसी समय आपको इस online क्लास का एक advantage मिलेगा। की आप क्लास जाये बिना ही अपना पढाई घर पर कर पाएंगे। बस आपके पास एक internet connection और smartphone या laptop होना चाहिए।

#2. ONLINE CLASSES में काफी पढने की OPPOURTUNITY है 

online क्लास में हमे पढने के लिए काफी opportunity मिलता है। जैसे की मान लीजिये आप job कर रहे है। और ऐसे में आपको अपने स्किल को बढ़ाने के लिए कुछ पढना है। तो ऐसे में आप अपना पढाई को कर सकते है। क्योकि इसमें टाइम का कोई सीमा नहीं होता है। आप जब चाहे टाइम निकल कर पढ़ा सकते है।

ऐसे में हमें एक दो नहीं जितने चाहे स्किल को develop कर सकते है। क्योकि आपको समय का कोई प्रॉब्लम नहीं रह जाता है। इसलिए इसमें कहा जाता है की online क्लास में पढने के लिए काफी opportunity है।

#3. ONLINE CLASSES काफी सस्ती पड़ती है

अब आप सोच रहे होंगे की online पढाई कैसे सस्ती हो सकती है। जी हा ये काफी सस्ती पड़ती है। हमलोग जब क्लासरूम में पढने जाते है तो वहां का रेंट इलेक्ट्रिक बिल इत्यादि ये सब भी जोड़ा जाता है हमारे फीस में। जिससे हमें ज्यादा फीस paid करनी पड़ जाती है। 

लेकिन online में ऐसा नहीं होता है। क्योकि सामने वाले को इस चीज का खर्चा बच जाता है। जिससे हमें online कोर्स काफी सस्ती में मिल जाती है। online में एक बार में काफी लोग को कनेक्ट किया जा सकता है। जिससे online काफी सस्ती पड़ जाती है। और ये सबलोग को काफी affordable price में मिल जाती है। 

#4. ONLINE CLASSES FLEXIBLE होते है

Online class करना हमारे लिए काफी flexible होते है। क्योकि जहा physical क्लास करने में समय काफी लग जाता है। वही online क्लास में हमें किसी भी तरह का समय बर्बाद नहीं होता है। क्योकि इसमें हमलोग अपने टाइम के अनुसार क्लास कर पाते है। 

आप जब चाहे उस समय पर क्लास कर पाते है जिसके कारण online class हमलोग के लिए flexible होते है। और ये इसका सबसे बड़ा advantage है।

#5. ONLINE CLASSES ज्यादा INTERACTIVE होते है

ये क्लास हमारे लिए काफी ज्यादा इंटरैक्टिव होते है। क्योकि इसमें ये नहीं होता है की किसी को पीछे वाले सिट में बैठना पड़ रहा है। इस क्लास में सबको ऐसा फील होता है की वो फ्रंट में बैठ कर क्लास कर रहे है। हमलोग में से काफी लोग ऐसे होते है की जिसको कुछ भी question पूछना होता है तो वो संकोच करते है। 

की सामने वाला क्या सोचेगा। तो ऐसे में हम अपने trainer या teacher को पर्सनली मेसेज कर के question पूछ सकते है। जिससे हमारा क्लास more interactive बन जाता है। classroom ट्रेनिंग में हमें ब्लैकबोर्ड पर पढना पड़ता है। वही online में हमें digital board के द्वारा क्लास करने मिलता है। जो क्लास को interactive बनाता है। 

इस तरह आपलोग ने देखा की कैसे online classes करने के advantage हमें मिलता है। अब बात करते है इसके Disadvantage के जो की निम्नलिखित है:

ONLINE CLASSES DISADVANTAGES के बारे में जाने

online classes advantage and disadvantage

#1. TECHNICAL KNOWLEDGE

Online classes के लिए सबसे important है की आपको लैपटॉप या मोबाइल के बारे में अच्छे से जानकारी हो। साथ ही आपको internet के बारे अच्छी जानकारी हो। उसके साथ ही जिस app पर हमलोग कनेक्ट हो कर अपना online क्लास करते है। उसका इंटरफ़ेस की जानकरी होनी चाहिए जिससे आप उस app का use कर सके।

जब ये सब का knowledge आपके पास रहेगा तभी आप आसानी से क्लास कर पाइयेगा। जब भी कोई टेक्निकल प्रॉब्लम आये तो उसका Troubleshoot करने भी आना चाहिए जिससे आप क्लास कर सके। अगर आपके पास टेक्निकल जानकारी थोड़ी भी नहीं है तो उसको online class करने में प्रॉब्लम आ सकती है।

#2. आँखों में PROBLEM आना

ये सबसे बड़ा प्रॉब्लम है जिसके वजह से आँखों में प्रॉब्लम आने लगता है। जब भी कोई online class करता है तो उसमे लम्बा समय क्लास करना होता है। जिससे आँखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। आँखों में जलन, पानी आना ये सब प्रॉब्लम आने लगता है। चेहरा का चमक जाने लगता है। 

online classes advantage and disadvantage

और भी तरह तरह के प्रॉब्लम दिखने को मिल जाता है। ये online class का सबसे बड़ा disadvantage है। जो भी online class करते है उनको अपने health के प्रति थोडा ध्यान देने की जरुरत होती है।

#3. INTERNET जरुरी है

online classes करने के लिए सबसे important होता है internet. बड़े शहर में तो इसका कोई प्रॉब्लम नहीं होता है। लेकिन वही अगर छोटे शहर या गाँव की बात करे तो वहां काफी प्रॉब्लम देखने को मिलता है। जिस वजह से ऐसे जगहों पर रहने वाले लोग को online class करने में काफी प्रॉब्लम आता है।

इस मामले में भी online क्लास का बड़ा disadvantage है। जिससे काफी लोग प्रभावित होते है।

#4. STUDENTS को समझने में PROBLEM

online class करने का जहा advantage है वही इसका disadvantage भी है। क्योकि online class में students को समझना थोडा मुश्किल होता है। क्योकि वहां पर physically presence नहीं हो पाता है। जिस तरह से फिजिकल presence में स्टूडेंट को समझाया जा सकता है उस तरह से online class में समझा पाना मुश्किल होता है।

online में सबको ये नहीं है की समझ आ ही जाये। क्योकि इसमें डायरेक्ट face to face क्लास नहीं होता है।

#5. INTERNET का MISUSE होना 

कोरोना के कारण आजकल ज्यादा classes online mode पर चल रहे है। जिसके कारण ज्यादा से ज्यादा पेरेंट्स अपने बच्चो को नया मोबाइल और लैपटॉप दिला रहे है जिससे की वो अच्छे से online पढाई कर सके। लेकिन यहाँ कुछ बच्चे तो अच्छे से पढ़ते है तो वही कुछ इस device और internet का गलत use करते है।

कुछ बच्चे internet से गेम डाउनलोड करते है, कुछ लोग गलत गलत चीज भी देखने लगते है। जिस से वो अपना पढाई ढंग से नहीं कर पाते है। ऐसे में पेरेंट्स को चाहिए की अपने बच्चो को ध्यान दे की वो अच्छे से पढ़ रहे है या नहीं।

CONCLUSION

Online Classes Advantages and Disadvantages in Hindi के बारे में आपने जाना। जिसमे online class करने के advantage और disadvantage के बारे में डिटेल में बताया गया है। कोरोना जैसे महामारी में काफी लोग को online mode पर शिफ्ट कर दिया है।

जिसमे सबसे अच्छी बात ये है की जो लोग इस technology के बारे कुछ नहीं जानते थे। आज के समय में उनको भी इसके बारे में अच्छी जानकारी हो गयी। जो की काफी अच्छी बात है। अगर आपलोग को ये पोस्ट अच्छा लगा हो तो हमें कमेंट करे। और हमारे पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर भी करे।

जिससे और भी लोगो तक ये इनफार्मेशन मिल सके। इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर भी शेयर करे। कोई भी सवाल है तो हमें mail भी कर सकते है।

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COMPUTER VIRUS KYA HAI AUR USKE TYPES | FULL DETAILS 2026

Computer Virus kya hai aur uske types

COMPUTER VIRUS क्या है – WHAT IS COMPUTER VIRUS IN HINDI

Computer Virus kya hai aur uske types

image of computer virus

हेल्लो दोस्तों नमस्कार कैसे है आपलोग ? आज मैं आपलोगों के लिए काफी ही interesting टॉपिक लेकर आया हु. जिसमे हमलोग जानेंगे computer virus के बारे में. ये क्या होता है और कैसे काम करता है और इससे computer को कैसे बचाया जा सकता है. तो आइये जानते है की computer virus क्या है – what is computer virus in hindi.

जो लोग computer का use करते होंगे उनको तो virus का नाम पता ही होगा. अगर नहीं पता तो आज आपके लिए इसी के बारे में इनफार्मेशन लेकर आया हूँ. की computer virus क्या होता है? ये virus computer और electronics gadgets के लिए काफी हानिकारक होते है.

क्योकि ये आपके computer में घुस जाता है. तो हमारा computer ख़राब हो सकता है, या उसका डाटा delete हो सकता है. जिससे हमारे important डाटा जा सकते है.

जैसे कोई बीमारी हमारे शरीर को हो जाता है. और उसको धीरे धीरे कमजोर करने लगता है. और अगर ठीक से इलाज न हो तो मौत भी हो जाती है. ठीक उसी प्रकार ये virus होता है जिससे हमारा system ख़राब हो सकता है. इसलिए virus के बारे में अच्छे से जानकारी होना जरुरी है जिससे system को बचाया जा सके.

COMPUTER VIRUS

Computer Virus एक छोटा सा software प्रोग्राम होता है. जिसको हमारे computer के operation और उसके डाटा को हानि पहुचाने के लिए बनाया गया होता है. ये हमारे जानकारी के बिना system को ख़राब कर सकते है जिसको ठीक करना मुस्किल हो जाता है.

हमारा computer बहुत सारे software प्रोग्राम से बनता है. ये प्रोग्राम computer को सही तरीके से काम करने के लिए बनाये जाते है. और कुछ प्रोग्राम computer को हानी पहुचाने के लिए बनाये जाते है.

ऐसे computer के virus को भी इन्सान ने ही बनाया है. जिससे जानबूझकर computer को ख़राब करने के लिए बनाया जाता है. या दुसरे शब्दों में कहे तो virus असल में computer programme ही होते है. जो computer के लिए काम न करके उसको नुकसान पहुचाने के लिए होते है.

जरूर पढ़े: 

COMPUTER VIRUS से क्या क्या हो सकता है ?

Computer Virus से हमारे software programme currupt हो सकते है. ये हमारे डाटा को permanently delete कर सकते है. हमारे हार्ड डिस्क के डाटा को हमेशा के लिए delete कर सकते है. ये email के जरिए दुसरे computer तक चले जाते है और दुसरे system को हानी पहुचाते है.

virus हमारे computer के speed को slow कर देते है. जिससे हमारा system काफी hang होने लगता है.

जैसे मान लीजिये हमलोग कोई word का file रखे है जिसमे कुछ इनफार्मेशन लिखा हुआ. और उसमे virus लग गया तो, ऐसे में वो file तो रहता है उसमे का इनफार्मेशन delete हो जाता है. या file ही currupt हो जाता है. या वो file open ही नहीं हो पाता है.

या हो सके तो पूरा word को ही currupt कर दे. जिससे पूरा Microsoft office ही currupt हो जाता है और कुछ भी open नहीं हो पायेगा. और अगर इसको किसी दुसरे system में share करेंगे तो ये दुसरे system को भी virus affected कर देगा.

BEST PC ANTIVIRUS SOFTWARE:

यहाँ मैं आपलोग को कुछ Best PC antivirus software के बारे में बता रहा हूँ. जिसको मैंने पर्सनली use कर रखा है. इनका परफॉरमेंस काफी अच्छा रहता है. मैं आपलोग को भी बोलूँगा की इनमे से ही कोई एक antivirus software use करे.

ये Best PC antivirus software आपके काफी आने वाले है. निचे दिए लिंक पर जाकर आप देख सकते है. 

MALWARE

Malware का पूरा नाम होता है malicious software. ये भी एक प्रकार का software programme ही होता है जिससे computer ख़राब हो सकता है. इसका मतलब होता है ख़राब software जो की बिलकुल ख़राब है, और एक बार system में आ गया तो पुरे system को ख़राब कर सकता है.

malware computer virus

image of computer virus

इसके चलते हमारे computer के डाटा को ये धीरे धीरे खत्म करने लगता है.

malware ज्यदातर इन्टरनेट के जरिए computer में आते है. जैसे की अगर हम गलती से भी malicious website पर click करके enter हो जाते है तो उससे भी malware computer में आ जाते है. या फिर अगर हमलोग कोई pirated software, games या movies download करते है तो वहा से भी ये हमारे computer में online आ जाते है.

ये तो थी online की बात अब बात करते है offline ये कैसे आते है.

जब हमलोग कोई डाटा pendrive, CD या DVD के जरिए अपने computer में copy करते है तो, ये malware यहाँ से भी हमारे computer में आ जाते है. और ये हमारे डाटा को नुकसान पहुंचा सकते है.

MALWARE तिन प्रकार के होते है :- VIRUS , WORMS और TROJAN HORSE

इसमें से virus के बारे में हमलोग ने उपर में जानकारी ले ली है बाकि Worms और Trojon Horse के बारे में जानते है.

WORMS

worms भी एक प्रकार का virus का ही रूप है. लेकिन ये अपने आपको multiply करते है, और अपने आपको ज्यादा से ज्यादा फैलाने को कोशिश करता है. अगर हमारे computer में worms आ गए तो. वो हमारे computer में बहुत सारे worms files copy करने चालू कर देते है.

जिससे की हमारा computer काफी slow काम करने लगता है. और अगर इसी files को हम copy करके दुसरे system में डालते है तो, ये worms वहा भी बहुत सारे copy बना लेते है, और उस system को भी slow करने लग जाते है.

TROJAN HORSE

ये भी एक प्रकार का malware ही है जो की अपने पहचान को छुपा कर system में आते है.

जैसे की मान लीजिये हम कोई site open किये है और वहां कोई add आया. तो हमलोग गलती से या जान भूझकर उस add पर click कर देते है. तो ये trojan वही से हमारे computer में enter कर जाते है. और इसकी हमें खबर भी नहीं लगती है और हमारा computer या system ख़राब हो जाता है.

ये बहुत सारे software के रूप में भी नेट पर available है. हमें लगता है की ये सही software है. और हमलोग उस पर click करके डाउनलोड करने की कोशिश करने लगते है. लेकिन असल में उसमे trojan छुपा होता है जो हमारे computer में enter कर जाते है.

और हमारे computer को slow करने शुरू कर देते है. और हमारा computer ख़राब हो जाता है.

कैसे पता करेंगे की COMPUTER में VIRUS है या नहीं

हम कैसे पता करेंगे की हमारे computer में virus है या नहीं. इसको check करने के लिए मैं कुछ tips निचे देता हूँ. जिससे हम पता कर सकते है, की computer virus इन्फेक्टेड है या नहीं:-

  1. हमारे computer के performance का slow होना
  2. computer screen पर बार बार pop-up का आना
  3. किसी भी programme का अपने आप start हो जाना
  4. कोई भी files का copy अपने आप बन जाना
  5. किसी भी नया file या programme का अपने आप install हो जाना
  6. कोई भी files, folders या programme का अपने आप currupt होना

अगर इस तरह के problem हमारे computer में आने लगे. तो समझ लीजिये की computer virus इन्फेक्टेड हो चूका है. तो इससे बचने के लिए हमें कोई भी अच्छा वाला antivirus का use करना चाहिए. जिससे computer virus इन्फेक्टेड न हो पाए.

या आप चाहे तो उपर बताये गए Best PC antivirus software की मदद से भी आप पता कर सकते है. की आपके कंप्यूटर में virus है या नहीं. उसके लिए आपको किसी एक एंटीवायरस software से अपने pc को स्कैन करना होता है. जिससे हमें पता चल जाता है की pc में virus है या नहीं.

कैसे इस VIRUS या MALWARE से बचा जा सकता है

  1. virus से बचना है तो हमें सबसे पहले एक अच्छा antivirus install करना होगा. और उसको टाइम to टाइम update करते रहना होगा.
  2. कोई भी mail open न करे जिसके बारे जानकारी नहीं है की किसने mail सेंड किया है. क्योकि इसके attachment के through virus हमारे computer तक आ जाते है.
  3. कोई भी ऐसी वैसी unauthorised site से कुछ भी डाउनलोड होने से बचे.
  4. अगर कही से डाउनलोड करते भी है तो उसको अच्छे से स्कैन करके ही use करे.
  5. कोई भी pendrive या memory card का use बिना स्कैन किये अपने computer में न करे.
  6. किसी भी site पर अगर visit करते है तो ये ध्यान रहे की वो site authorised site हो.
  7. कोई भी अगर add आये. जिसमे बताया गया हो की आपको इसमें इतना prize जितने का मौका है, या और कुछ. तो ऐसे site से भी आप दूर ही रहे है. क्योकि ऐसे site से भी काफी virus आते है.

मैं आशा करता हु आपलोगों की इस पोस्ट में काफी इनफार्मेशन मिला होगा. की virus क्या है. अगर पोस्ट अच्छा लगे तो इसको आगे भी अपने दोस्तों तक share करे. और कुछ सुझाव है तो उसको मुझे comment करके या mail करके बताये. जिससे मैं आपके लिए और भी अच्छे से पोस्ट ला सकू.

Thanks !!!

FERRITE CHOKE OR FERRITE BEAD का USE CHARGER में क्यों होता है?

Why use Ferrite choke or Ferrite Bead in laptop Charger in Hindi

Why use Ferrite choke or Ferrite Bead in laptop Charger in Hindi. हेलो दोस्तों  Techno Gyan में आपका स्वागत है आज हम आपको बताएँगे की Ferrite choke or Ferrite Bead क्या होता है। हम आपको इसके बारे में काफी आसान तरीके में बताएँगे। जिसमे मुझे यकीन है की आपको हमारी यह नयी पोस्ट पसंद आयेगी।

अगर आप Laptop या Mobile charger use  करते होंगे तो आपने एक चीज शायद ध्यान दिया होगा की charger के wire  में एक cylinder नुमा लगा चीज होता है। जिसको हमलोग Ferrite choke or Ferrite Bead कहते है।

WHAT IS FERRITE CHOKE OR FERRITE BEAD IN HINDI?

why use ferrite bead in laptop charger

Image of Ferrite choke or Ferrite Bead in laptop Charger

एक Ferrite Bead high frequency को खत्म करता है और इसे Laptop या mobile के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में प्रवेश करने से दूर करता है। क्योंकि अधिकांश बिजली सर्किट बिजली आपूर्ति पिन पर शोर होने पर प्रदर्शन में गिरावट का सामना करते हैं।

इसके अलावा यह Laptop के अंदर उत्पन्न उच्च आवृत्ति संकेतों के संचालन को रोकता है। जो अन्य उपकरणों के लिए विद्युत चुम्बकीय को काफी कम करता है। Ferrite Bead Inductor हैं जिसके परिणामस्वरूप high  frequency संकेतों के लिए उच्च प्रतिबाधा होती है।

Ferrite Bead, EMI Filter मिश्रित लौह ऑक्साइड (जंग) से बना अर्द्ध चुंबकीय पदार्थ  होता है। यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयोग किया जाता है कि तार अनजाने में रेडियो में परिवर्तित तो  नहीं होता है। कोई भी लंबा तार प्रभावी रूप से एंटीना है। इसका मतलब है कि इसमें रेडियो तरंगों को Transmit  करने और Receive  करने की क्षमता है। यह दो कारणों से खराब हो सकता है:

  • UNKNOWN TRANSMITTER

तार से जुड़े डिवाइस स्रोत तार के विद्युत प्रवाह में भिन्नता का कारण बन सकता है। ये भिन्नता तारों को रेडियो तरंगों को प्रसारित करने का reason बन सकती हैं और ये तरंगें नजदीकी उपकरणों में हस्तक्षेप कर सकती हैं।

  • UNKNOWN RECEIVER

इसके विपरीत, पास के डिवाइस रेडियो सिग्नल उत्पन्न करते हैं जो तार द्वारा उत्पन्न किये जाते हैं। ये सिग्नल तार में विद्युतीय प्रवाह को बदल सकते हैं जो बदले में जुड़े उपकरणों से हस्तक्षेप कर सकता है।

Ferrite Bead एक प्रेरक के रूप में काम करता है जिसका इस्तेमाल तार पर कम-पास Filter बनाने के लिए किया जाता है। Filter प्रभावी रूप से तार पर high frequency को खत्म करता है और इस प्रकार इसे रेडियो तरंगों को Transmit  / Receive करने से रोकता है।

अगर चार्जर में ये ferrite choke or ferrite bead नहीं लगाये जाये तो क्या होगा? 

किसी भी लैपटॉप या मोबाइल के चार्जर में अगर ferrite bead नहीं लगेगा तो. ये कोई भी बाहर का फ्रीक्वेंसी को कैप्चर कर लेगा। क्योकि जब हम चार्जर को power से कनेक्ट कर use करते है उस समय चार्जर का केबल एक सिग्नल के तरह काम कर रहा होता है।

जब फालतू का फ्रीक्वेंसी आपके चार्जर के जरिये आपके किसी भी device में आ जायेगा। तो उससे आपके device में प्रॉब्लम आ सकती है। ऐसा प्रॉब्लम नहीं आये इसी के लिए इस ferrite bead का use किया जाता है. जिससे आपके device ख़राब नहीं हो पाए।

RELATED POST :

CONCLUSION

इस ब्लॉग आपने सिखा Why use Ferrite choke or Ferrite Bead in laptop Charger. की कैसे लैपटॉप के चार्जर में इसका use किया जाता है।

दोस्तों मैं आशा करता हु मेरा ये ब्लॉग अच्छा लगा होगा अगर अच्छा लगा तो कृपया हमें कमेंट करे और। अगर कुछ कमी हो तो उसको भी बताये। इससे Related और कोई प्रश्न है तो हमें बताये मैं उसका Answer जरूर दूंगा जिससे आपलोग उसके बारे में गहराई तक जान सके।

आप हमारे ब्लॉग को ज्यादा से ज्यादा share करे जिससे इसका फायदा और भी लोगो तक पहुंचे। किसी भी तरह का सुझाव या question के लिए हमें आप mail कर सकते है।

COMPUTER और LAPTOP के SPEED कैसे बढ़ा सकते है | HOW TO SPEED UP COMPUTER OR LAPTOP

How to Speed Up Computer in Hindi

Hello Friends ! नमस्कार, आज हमलोग बात करेंगे कंप्यूटर के स्‍पीड के बारे में की How to speed up computer in hindi. कैसे इसमें स्‍पीड को हमेशा बनाये रखे. जिससे हमारा कंप्यूटर अच्छा performance दे सके. तो दोस्तों आज के इस टॉपिक में हम कुछ tips को follow करेंगे. जिससे अपने कंप्यूटर के स्‍पीड को बढ़ा सकते है. तो चलिए आगे बढ़ते है और देखते है की How to speed up computer in hindi.

अगर हमें अपने कंप्यूटर का स्‍पीड अच्छा चाहिए. तो उसके लिए हमलोग कुछ निम्न टिप्स का इस्तेमाल करके अपने कंप्यूटर का स्‍पीड को बढ़ा सकते हैं.

ये भी पढ़े:

HOW TO SPEED UP COMPUTER OR LAPTOP – COMPUTER के SPEED को कैसे बढ़ाएं?

विंडोज परफॉरमेंस ट्रबलशूट 

विंडोज 7 में एक ऐसा फीचर है जो हमारे विंडोज की सभी problems को  अपने आप ठीक  कर सकता है जिसका नाम है Performance Troubleshoot. इस सेटिंग को खोलने के लिए हम कुछ step को follow कर सकते हैं :-

  • start बटन पर क्लिक करे।
  • control panel में जाये।
  • फिर Troubleshooting पर क्लिक करे।
  • यहॉ system and security दिखाई देगा उस पर क्लिक करे।
  • अब यहॉ check for performance issues  पर क्लिक करे।

यहॉ हमें हमारे कंप्यूटर की सारी समस्‍यायें दिखाई देगी। फिर एक-एक करके उन पर क्लिक करेंगे और प्रॉब्लम को ठीक करते जायेंगे।

फालतू के SOFTWARE को COMPUTER से हटा दे

अकसर हम क्या करते है की बेकार के software जिसका इस्तेमाल हम शायद कभी नहीं कर पाते है उसको भी बेवजह computer में install कर के रखते है जिससे हमारा computer slow काम करने लगता है. तो अगर आपके computer में ऐसे software पड़े हुए है तो उसको अपने computer से हटा दे या uninstall कर दे. uninstall करने के निम्न step को follow करे :-

  1. स्‍टार्ट बटन पर क्लिक कर control panel में जाये। अब programe and features को open करे।
  2. यहॉ सभी सॉफ्टवेयर की List आ जायेगी। अब जिस भी सॉफ्टवेयर को uninstall करना है उसे mouse से select कर ले।
  3. प्रोग्राम को select करने के बाद uninstall/Change बटन पर जाये और uninstall/Change बटन पर क्लिक करे।
  4. क्लिक करने के बाद uninstall की process शुरू हो जायेगी, और कुछ ही समय में प्रोग्राम uninstall हो जायेगा।

DEFRAGMENT का इस्तेमाल करें 

How to Speed Up Computer/Laptop in Hindi
Image of How to Speed Up Computer in Hindi

Defragment का इस्तेमाल कर के हार्डडिस्‍क को organize करें, यह हमारी हार्डडिस्‍क में पडी सभी unorganize फाइलों को organize कर देता है, इसके लिये किसी भी हार्डडिस्‍क के किसी भी पार्टीशियन पर माउस से राइट क्लिक करे >फिर Properties पर click करे > Tool पर click करे > Defragment now पर क्लिक करे, इस तरह defragmentation का process शुरु हो जायेगा इसको पूरा होने में कुछ समय लगता है.

जरुर पढ़े :

SPEED UP COMPUTER USING DELETED TEMPORARY FILES

अपने कम्‍प्‍यूटर से टैम्‍परेरी फाइलों को डिलीट कर दे, इसके लिये ड्राइव C open करे > Windows फोल्‍डर को open करे और उसमे Temp वाला folder को search करके उसके सारे file को delete कर दे। इससे कम्‍प्‍यूटर में बेकार सभी temporary files डिलीट हो जाती है और हमारे हार्डडिस्‍क में स्‍पेस भी मिलता है। जिससे हमारा computer काफी fast काम करने लगता है.

SPEED UP COMPUTER USING ANTIVIRUS

वायरस भी कंप्यूटर की स्‍पीड को काफी slow कर देते हैं, इसलिये कंप्यूटर में एक अच्छा  antivirus का होना जरुरी है लेकिन बहुत से लोग कम्‍प्‍यूटर में वायरस से बचने के लिये एक साथ 2-3 या उससे भी ज्‍यादा antivirus install कर लेते हैं, जिससे उनके कंप्यूटर की स्‍पीड बहुत ज्‍यादा slow हो जाती है, ध्यान दे की एक बार में केवल एक ही antivirus का उपयोग  करें। ये भी एक बहुत बड़ा कारण है computer slow करने का.

BEST ANTIVIRUS UNDER 800 INR

  1. McAfee Antivirus – 1 User, 3 Years
  2. Max Secure Anti-Virus Plus | 1 PC 1 YEAR | Windows
  3. Quick Heal Antivirus Pro Latest Version – 1 PC, 1 Year
  4. Kaspersky Total Security Latest Version- 1 User, 1 Year

हार्ड डिस्क के BAD SECTOR को SCAN करे

How to Speed Up Computer/Laptop in Hindi

हमारा हार्ड डिस्क में bad sector के वजह से भी computer काफी slow काम करने लगते है, तो इसके लिए अपने कम्‍प्‍यूटर के हार्ड डिस्क को कुछ कुछ दिन में bad sector के लिए स्कैन करते रहे जिससे कम्‍प्‍यूटर की स्‍पीड बनी रहेगी.

Bad sector scan करने के लिए इस step को follow करेंगे :-

हार्डडिस्‍क के किसी भी पार्टीशियन पर माउस से राइट क्लिक करे >फिर Properties पर click करे > Tool पर click करे > check now पर क्लिक करे >scan for and attempt…..  check box पर click करे और start button पर click कर दे. इस तरह bad sector scan होना शुरु हो जायेगा जिसमे कुछ टाइम लग सकता है. इस तरह भी हमारे कम्‍प्‍यूटर के स्‍पीड काफी अच्छा हो जाता है.

CONCLUSION

इस पोस्ट में आपने सिखा की How to speed up computer. किस तरह से हमलोग अपने PC या लैपटॉप के speed को काफी आसानी से बढ़ा सकते है.और कंप्यूटर को speed के साथ use कर सकते है.

तो दोस्तों कैसा लगा आज का टॉपिक अच्छा लगे तो सब्सक्राइब करे. और अपने दोस्तों के साथ ज्यादा से ज्यादा share करे. जिससे ये सारे इनफार्मेशन आसानी से सभी तक पहुँच सके. और सबलोग hindi में पढ़कर अपने gyan को बढ़ा सके.

Thanks.

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