CLOUD COMPUTING क्या है | (ये कैसे काम करता है?)

Cloud Computing in Hindi

CLOUD COMPUTING DEFINE IN HINDI – CLOUD COMPUTING क्या है?

Cloud Computing  के बारे में हम हमेशा कही न कही पढते रहते हैं, Cloud Computing इस्तेमाल करके हम अपना काम काफी आसान बना सकते हैं। क्योकि इसके वजह से हमलोग कही भी रहकर अपने files को access कर सकते है। इससे आप सभी Documents, Files, photos, music etc. को Computer के साथ साथ internet पर भी save करके रख सकते है।

ये सारे files को हमलोग दो तरह से save करके रख सकते है- personal और shared. इसमें personal files को सिर्फ हमलोग खुद से access कर सकते है, जबकी Shared files को हम अपने दोस्तों और group में shared कर सकते है जिससे यह फायदा  होता है कि यदि हम कोई Project पर काम  कर रहे हो तो उसे अपने group में Easily Shared कर सकते हो। उसे अपनी सुविधानुसार देख सकते हो और उसे convert कर सकते हो।Cloud Computing in Hindi

Image of Cloud Computing in Hindi

एक और फायदा  हमें यह मिलता है की हमारी files online और offline सेव कर सुरिक्षत रख सकते हैं। सबसे important बात ये है की अगर हमारा computer ख़राब हो जाये या hard drive ख़राब हो जाते है। तब उस हालत में हमलोग अगर अपने files को क्लाउड storage में रखा होगा तो, उसको कही भी साइबर कैफ़े या किसी दोस्त के computer से कही भी कभी भी access कर सकते है।

जिससे हमारा डाटा लूज़ भी नहीं होता और अपना काम काफी आसानी से हो सकता है।

CLOUD COMPUTING के कुछ EXAMPLES

इस आज के technology में हमलोग सभी cloud computing का इस्तेमाल करते है। तो मै आपलोगों को इसी में से use होने वाले कुछ example देने वाला हूँ।

Email – सबसे पहले हमारा mail आता है। जिसको की हमलोग डेली अपने लाइफ में use करते है। और ये सबसे अच्छा example है cloud computing के। इसको हमलोग कही से भी use कर पाते है। इसमें हमारा डाटा store करने की capacity भी मिलती है।

Youtube – इसका use भी आज के डेट में काफी होने लगा है। क्योकि इस पर डेली बहुत ज्यादा मात्रा में video अपलोड किये जाते है। जिसको हमलोग कही से भी बैठे हुए देख पाते है। और अच्छे अच्छे video का मजे ले पाते है। 

Cloud Computing in Hindi

Facebook – cloud computing का सबसे अच्छा example फेसबुक है। क्योकि यहाँ अरबो की संख्या में लोगो का डाटा आता है। जिसको access करने के लिए फेसबुक cloud computing का इस्तेमाल कर रहा है।

इसके अलावा और भी काफी प्लेटफार्म है जहा पर इस technology का use हो रहा है।जैसे की instagram, linkdin, quora इत्यादि।

USES OF CLOUD COMPUTING – CLOUD COMPUTING के USE

वैसे तो देखे तो हमलोग आज के डेट में काफी कुछ क्लाउड कंप्यूटिंग से रिलेटेड ही use कर रहे है। जिसमे डेली का mail हो गया। सोशल मीडिया हो गया। बड़े बड़े offices या सरकारी offices के server हो गए। ये सब में क्लाउड कंप्यूटिंग का ही use किया जा रहा है। अभी मै आपलोग को कुछ इसके uses के बारे में बताने वाला हूँ। जो की निम्नलिखित है:

Website hosting – आज के समय में जितने भी हम साईट को access करते है। वो सब क्लाउड कंप्यूटिंग कोऊ ही use करते है। तभी हमलोग कही से भी अपने साईट को access कर पाते है।

File storage – आज के समय में इसका use file को cloud पर store करने में भी किया जाता है। जैसे की Drop box, google drive इत्यादि। जिसके कारण हम इसको remotly access कर पाते है।

Backup and Recovery – काफी लोग है जो अपने कंपनी के डाटा का backup manully लेते है। जो की उतना कारगर नहीं है। लेकिन वही क्लाउड में बात करे तो हम अपने डाटा का backup cloud में ले सकते है। और जब चाहे इसको रिकवर भी आसानी से कर सकते है।

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Cloud database – आप सभी जानते है की किसी भी काम के लिए database काफी जरुरी होता है। जिसको मेंटेन करना काफी कठिन और महंगा होता है। वही अगर cloud की बात करे तो ये काफी अच्छा माना जाता है। cloud service provider काफी अच्छा service देते है साथ ही मेंटेनेंस भी देखते है database का।

Test and Development – कोई भी software या network का testing और development में क्लाउड कंप्यूटिंग का अच्छा role माना जाता है। क्योकि ये रेगुलर चेक करते रहता है की आपका सब सिस्टम ढंग से काम कर रहा है या नहीं।  

CLOUD COMPUTING TYPES – CLOUD COMPUTING के TYPES

इसको मुख्यता तिन भागों में विभाजित किया है 1.Iaas, 2.PaaS, 3.SaaS

CLOUD COMPUTING TYPES

1. IaaS(Infrastructure as a service)

इस तरह के service में cloud computing से रिलेटेड power, storage और जितने भी control होते है सारा user के पास होते है। इसका सबसे ज्यादा use business purpose के लिए किया जाता है। vertual private network, router और firewall इसका सबसे बड़ा example है।

2. PaaS(Platform as a service)

इसके अंतर्गत user को सिर्फ एक प्लेटफार्म मिलता है। जिसके वजह से हम इसको पूरी तरह control नहीं कर पाते है। इसको control करने के लिए क्लाउड प्रोवाइडर की जरुरत पड़ती है। जैसे की gmail, yahoo, outlook इत्यादि।

3. SaaS(Software as a service)

इसको third party द्वारा मैनेज किया जाता है। जिसका use एक निश्चित काम करने के लिए किया जाता है। इसको ज्यादातर छोटे business में use किया जाता है। इसमें इसका यूजर इंटरफ़ेस क्लाइंट के तरफ से ही एक्सेस किया जाता है। जैसे की google docs, app engine इत्यादि।

CLOUD COMPUTING के फायदा

  • हम सभी Documents और files को online या offline backup रख सकते है।
  • अपने files को कही भी access कर सकते है।
  • files को एक बार में बहुत जगह पर Share किया जा सकता है।
  • computer खराब होने पर कही भी उस computer के डाटा को access किया जा सकता है।
  • उस file को एक समय में बहुत devices में access कर सकते है जैसे computer, mobile, tab इत्यादी।
  • cloud computing में कोई भी extra hardware की जरुरत नहीं पड़ती है।
  • इसको use करना बहुत ही आसान है।
  • files को online भी edit कर सकते है।
  • इसमें files की size की कोई limitation नहीं होती है, जैसे की आपलोग जानते होंगे की जब हमलोग mail करते है तो उसमे सिर्फ 10MB तक के files को ही कही भी share किया जा सकता है। लेकिन इसमें आप कितनी भी बड़ी file को share कर सकते है।
  • कहीं भी अपनी files को use किया जा सकता है।

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HOW TO WORK CLOUD COMPUTING IN HINDI – CLOUD COMPUTING कैसे काम करता है?

Physical server पर information और software स्‍टोर होता है जिसके द्वारा क्लाउड कम्प्यूटिंग work करता है। जिसपर  server provider के द्वारा control किया जाता हैं।

क्लाउड कंप्यूटिंग कैसे काम करता है ये समझने के लिए, imagine करे कि क्लाउड मे दो part हैं – बैक एन्ड और फ्रंट एन्ड। फ्रंट एन्ड उसे बोलेंगे जिसे हम देख सकते हैं और उसके साथ Interact कर पाते हैं।

जब हम वेबमेल एक्‍सेस करते हैं, जैसे gmail तो वह क्लाउड के फ्रंट एन्ड part पर रन हो रहे सॉफ्टवेयर की वजह से possible हो पाता हैं। यह same बात  फेसबूक, yahoo या gmail के लिए भी लागू होते हैं। बैक एन्ड मे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का parts होता हैं जो की फ्रंट एन्ड क्या हो रहा है उसको देखने के लिए मदद करते हैं।

NAME OF WEBSITES THAT PROVIDE CLOUD STORAGE SERVICE

  1. Google Drive
  2. Microsoft Sky Drive
  3. Drop Box

ADVANTAGES OF CLOUD COMPUTING :

1)  ACCESS FROM ANY PLACES:

Cloud Computing ऐसा technology है, जिसके इस्तेमाल हमलोग कभी भी कही भी बड़े ही आसानी के साथ कर सकते है। जैसे की आज के डेट में google drive use किया जाता है। हा इसमे एक बात important है वो ये की आपको access करने के लिए इन्टरनेट जरुर होना चाहिए।

cloud computing हमारे speed को बढाता है क्योकि इससे हमलोग कही भी रह कर अपने डाटा को access कर सकते है। Business के purpose से देखा जाये तो ये काफी खास है। क्योकि इससे आप कही भी बगैर डॉक्यूमेंट लिए जा सकते है। और जब जरुरत पड़े हम अपने उस डॉक्यूमेंट को अपने ऑफिस में या कही भी सबमिट कर सकते है।

2) EXTRA STORAGE:

पहले के टाइम में हमलोग अपने हार्ड Drive पर सीमित रहते थे। Cloud Computing से storage में growth हुआ है, जिससे अब हमें storage खत्म होने का डर नहीं रहा। अभी हमें Google Drive पर फ्री में 15GB तक storage देता है। जिसको को हम चाहे तो आगे भी बढ़ा सकते है। जिसमे हमें yearly paid करना होता है।

DISADVANTAGES OF CLOUD COMPUTING :

1) SECURITY:

जब हमलोग Cloud Computing इस्तेमाल करते है तो उस समय, हम अपने डेटा को किसी और company  को जरिए use कर रहे होते हैं। इसका मतलब यह है कि, सर्वर को दुनिया में कई यूजर्स एक साथ एक्‍सेस कर रहे होते है, तो इसमें सुरक्षा को लेकर थोडा tension बना होता है। हालांकि कुछ सर्वर स्पैम फ़िल्टर, ईमेल एन्क्रिप्शन, और सुरक्षित HTTPS का उपयोग कर रहे हैं|

2) PRIVACY:

क्लाउड कंप्यूटिंग में देखा जाये तो थोडा प्राइवेसी कम  है जिससे अनाधिकृत यूजर आपकी जानकारी को एक्‍सेस कर सकता है। यह होने से रोकने के लिए, क्लाउड कंप्यूटिंग सर्वीस पासवर्ड सुरक्षा देती हैं और डेटा encryption technology  के साथ सुरक्षित सर्वर पर कार्य करते हैं।

 3) INTERNET:

जबकि आजकल इंटरनेट का इस्तेमाल काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी यह हर जगह availabe नही है। अगर आप ऐसे जगह है, जहाँ इंटरनेट की सुविधा नहीं है, तो वहां आप क्‍लाउड सर्वीस को use नही कर सकते।

CONCLUSION

आज आपलोग ने देखा की Cloud Computing क्या होता है और ये कैसे काम करता है ? आपलोग ने cloud computing types के बारे में जाना। cloud computing के advantage और disadvantage के बारे में जाना। तो दोस्तों आज का टॉपिक कैसा लगा हमें जरुर comment करके बताये।

जिससे आपके लिए और भी अच्छा अच्छा ब्लॉग लेकर आ सकू। और आप लोगो को ज्यादा से ज्यादा इनफार्मेशन मिल सके। जिससे आप अपने निजी जीवन में use कर सके। अपने सुझाव हमें जरुर share करे जिससे और अच्छी तरह आपके सामने अपने ब्लॉग ला सकू। आप हमें mail कर सकते है।

 

WINDOWS COMMAND PROMPT TRICK IN HINDI | टॉप ट्रिक्स जाने

Windows Command Prompt Trick in Hindi

WINDOWS COMMAND PROMPT TRICK IN HINDI – WINDOWS COMMAND PROMPT TRICK हिंदी में

Hello दोस्तों नमस्कार ! मै आज आपलोगों के काफी महत्वपूर्ण information windows command prompt trick in hindi में लेकर आया हु. जिससे computer को काफी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. अपने life में या फिर offices में.

आज हमलोग जानेगे command prompt के सभी short cut के बारे में जिसका इस्तेमाल के लिए शायद हमलोग थोडा लम्बा process करके अपना काम करते है. तो आइये आगे बढ़ते है और अपने daily life में use होने वाले  windows command prompt trick के बारे में जानकर अपने computer को इस्तेमाल करने में और आसान बनाते है.

Command Prompt जिसको हमलोग MS DOS के नाम से भी जानते है. वैसे इसका इस्तेमाल आजकल बहुत कम होता है या कहे तो ना के बराबर होता है. लेकिन क्या आप जानते है ये बहुत ही काम का है. जिससे हम काफी आसानी से कोई भी प्रोग्राम open कर सकते है, और उसका इस्तेमाल कर सकते है.

windows command prompt trick के बारे में आज कल बहुत ही कम लोग जानते है, इसमें बहुत काफी command होते है. जिसका इस्तेमाल हमलोग generally कर सकते है, और औरों की नजर में अपना इम्प्रैशन जमा सकते है. तो चलिए देखते है इन सारी command के बारे में की ये किस तरह इस्तेमाल करते है.

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  • सबसे पहले जानते है की cmd prompt खुलता कैसे है उसके लिए आप इस step को follow कर सकते है :- click start button+R > write cmd > enter इस तरह हमारे computer का cmd prompt खुल जायेगा. जैसा की picture में दिखाया गया है.

Windows Command Prompt Trick in Hindi

Image of Windows Command Prompt Trick
  • इसके बाद अगर हमें कोई site open करना है तो उसके लिए cmd prompt में start के बाद space देना है(जैसे start  www.technogyan.in) और फिर उसमे site का नाम type करना और फिर enter button click करना है इससे वो site open हो जायेगा.

Windows Command Prompt Trick in Hindi

  • उसी तरह हम कोई application भी open कर सकते है उसके लिए भी same तरीका है पहले start लिखना है फिर space उसके बाद(जैसे start Photoshop) जो application खोलना है उसका नाम या command नाम type करे. इस तरह वो application open हो जायेगा. जैसा की फोटो में दिखाया गया है :

Windows Command Prompt Trick in Hindi

  • यहाँ मै कुछ खास खास window रन command की लिस्ट दे रहा हु जिसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है, इसको हमलोग command prompt में आसानी से इस्तेमाल कर सकते है और उस खास प्रोग्राम को आसानी से open कर सकते है :

WINDOW COMMAND PROMPT के कुछ TIPS निम्न है.

  1. word pad –  write
  2. window media player – wmplayer
  3. window explorer – explorer
  4. volume mixer – sndvol
  5. utility manager – utilman
  6. task manager – taskmgr
  7. system properties – sysdm.cpl
  8. sticky note – stikynot
  9. sound recorder – soundrecorder
  10. snipping tool – snippingtool
  11. screen resolution – cpl
  12. remote desktop connection – mstsc
  13. registry editor – regedit
  14. program and features – appwiz.cpl
  15. problem step recorder- psr
  16. print management – msc
  17. power option – powercfg.cpl
  18. performance option – systempropertiesperformance
  19. paint – mspaint
  20. on-screen keyboard- osk
  21. notepad –notepad
  22. network connection – ncpa.cpl
  23. mouse control – main.cpl
  24. math input panel- mip
  25. magnifier –magnify
  26. internet option –cpl
  27. internet explorer – iexplore
  28. google chrome – chrome
  29. firefox – firefox
  30. font viewer – fontview
  31. event viewer – msc
  32. ease of access center – utilman
  33. disk management – msc
  34. disk defragmenter – dfrgui
  35. disk cleanup – cleanmgr
  36. device manager – devmgmt.msc
  37. date and time – cpl
  38. control panel – control
  39. computer management –msc
  40. character map – charmap
  41. calculator – calc
  42. add hardware wizard – hdwwiz
  43. open picture folder – pictures
  44. document folder – documents
  45. download folder – downloads
  46. shut down windows – shutdown
  47. restart windows – shutdown -r
  48. logoff  – logoff
  49. photoshop – Photoshop
  50. ms word – word.exe
  51. ms excel – excel.exe
  52. ms PowerPoint – mspaint.exe

ये भी पढ़े:

CONCLUSION

आपने सिखा windows command prompt trick in Hindi. जिसमे की मै काफी सारे command लाइन के बारे में बताने की कोशिस किया हु. जिसके हेल्प से आप अपने बहुत से काम काफी आसानी से command के जरिये कर सकते है.

इस तरह हमलोग काफी आसानी से अपने computer को हैंडल कर सकते है इस command शोर्ट कट के जरिए इसके बस हमें कुछ important command याद होने चाहिए और हम चुटकी में अपना काम निपटा सकते है. तो दोस्तों कैसा लगा ये ट्रिक हमें बताये comment कर के. 

Thank You.

 

PEN DRIVE SIZE कंप्यूटर में कम क्यों SHOW होते है ? | बेस्ट टिप्स

Why Pen Drive Size or Hard Drive Size Shows Less Size

Hello Friends! TechnoGyan में आपका फिर से एक नए Blog में स्वागत है। दोस्तों आज मैं आपलोगो के लिए एक नया Topic लेकर आया हु जिसमे हमलोग आज जानेगे की Pen drive में या किसी भी Hard disk या Memory card में जितने भी Memory Space होते है वो Actual क्यों नहीं दिखते है। तो चलिए आगे देखते है और समझते है की Why Pen Drive Size or Hard Drive Size Shows Less Size in Hindi.

दोस्तों आपलोग हमेशा ये सोचते होंगे की ऐसा क्यों होता है। इसके पीछे का क्या कारण है आपने बहुत लोगो से पूछा भी होगा। जैसे की Shop Keeper से लेकिन शायद वो सही Answer नहीं दे पाते और बोलते है की ये System अपना खुद का Space रख लेता है जिससे से की हमारे Pen drive में या Hard disk drive में कम Space मिलता है।

तो आज इस Topic में आपको पूरी Proof के साथ ये समझाऊंगा की आखिर ऐसा क्यों होता है।

ये भी पढ़े:

WHY PEN DRIVE SIZE OR HARD DRIVE SIZE SHOWS LESS – PEN DRIVE और HARD DRIVE का SIZE कम क्यों दिखता है ?

PEN DRIVE या HARD DISK बनाने वाली COMPANY द्वारा USE होने वाली CALCULATION TECHNIQUE.

हमलोग Base-10, Decimal no. system में number के बारे में सोचते हैं, क्योंकि हमारे पास 10 standard number होते  हैं। यही वजह है कि इन सारे numbers के हिस्सों को “अंक” कहा जाता है – जैसे हमारे हाथों, पैरों के 10 उंगलियों की तरह। Computer दूसरी तरफ, Base-2, Binary no. system के बारे में सोचता हैं।Manufacturing Company 1 MB = 1000 KB पर काम करते हैं। लेकिन Computer इसे 1 MB = 1024 KB समझता है।

यही सबसे बड़ा कारण है की हमारा Pen drive या किसी भी Memory card का कुछ हिस्सा हमें नहीं मिल पता है या हम access नहीं कर पाते है।तो चलिए इसको हम एक Calculation से समझते है।

नीचे गणना देखें:

Calculation by Computer

Calculation by Companies

1 MB = 1024 KB.

1 MB = 1000 KB.

1 GB = 1024 MB.

1 GB = 1000 MB.

एक Example से समझते है की 16GB में 14.9GB कैसे होता है ?

Company के हिसाब से calculation(1MB=1000KB)

Calculation according to Companies

Calculation according to Computer

16GB*1000 = 16000MB

16000*1000=16000000KB

16000000*1000=16000000000B

16000000000B/1024=15625000KB

15625000KB/1024=15258.7890625MB

15258.7890625MB/1024=14.9011GB

 

अब  Pen drive का मेमोरी set हो चूका है. कंपनियों के हिसाब से अब जैसे ही हमलोग उस Pen drive को कंप्यूटर में या मोबाइल में लगाते है. वैसे ही कंप्यूटर उस Pen drive का calculation Binary में करने लगता है. और उस Pen drive का मेमोरी को 1024 के हिसाब से डिवाइड करने लगता है।

हमारे Pen drive या Hard disk drive का मेमोरी कम show होने लगता है।

Also Read :

CONCLUSION

आपने सिखा की Why Pen Drive Size or Hard Drive Size Shows Less Size. कैसे जब हम कोई भी pendrive या मेमोरी card अपने pc में या मोबाइल में लगाते है तो उसका space कम दिखाई देता है. ये मै काफी आसान से समझाने की कोशिस किया हु.

तो मैं आशा करता हु की आपलोगो का Doubt Clear हो गया होगा की किसी भी मेमोरी का space कम क्यों होता है। अगर ये टॉपिक अच्छा लगा हो तो कृप्या हमें comment box में comment जरुर करे. 

Thank You!!

 

SOLAR SYSTEM क्या है ये कैसे काम करता है ? | FULL DETAILS

What is Solar System and How Do Solar System Work

What is Solar System and How Do Solar System Works in Hindi. Hello Friends! Technogyan आपलोग के लिए लेकर आया है एक नया टॉपिक जिसमे आपलोग का स्वागत है तो चलिए आगे देखते है और उसके बारे में जानते है की किस तरह से काम करता है, आजकल ये काफी use किया जा रहा है तो आइये चलते है और समझते है की ये क्या है और कैसे काम करता है. What is Solar System and How Do Solar System Works in Hindi.

सौर ऊर्जा सूर्य की ऊर्जा को कैप्चर करके और इसे आपके घर या व्यवसाय के लिए बिजली में बदलकर काम करती है।

WHAT IS SOLAR SYSTEM AND HOW DO SOLAR SYSTEM WORKSOLAR SYSTEM क्या है और SOLAR SYSTEM कैसे काम करता है?

हमारा सूर्य एक प्राकृतिक परमाणु रिएक्टर है। यह फोटॉन नामक ऊर्जा के छोटे पैकेट जारी करता है, जो सूर्य से पृथ्वी तक लगभग 8.5 मिनट में 93 मिलियन मील की यात्रा करते हैं। हर घंटे, पर्याप्त फोटॉन हमारे ग्रह को एक पूरे वर्ष के लिए वैश्विक ऊर्जा जरूरतों को सैद्धांतिक रूप से संतुष्ट करने के लिए पर्याप्त सौर ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए प्रभावित करते हैं।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की 2017 की रिपोर्ट से पता चलता है कि सौर ऊर्जा का दुनिया का सबसे तेजी से विकास करने वाला स्रोत बन गया है – पहली बार सौर ऊर्जा के विकास ने अन्य सभी ईंधनों को पार कर लिया है। आने वाले वर्षों में, हम सभी को एक या दूसरे तरीके से सौर ऊर्जा से बिजली का लाभ मिलेगा।

सौर पैनल कैसे काम करता है?

What is Solar System and How Do Solar System Work

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जब फोटोन एक सौर सेल से टकराते हैं, तो वे इलेक्ट्रॉनों को अपने परमाणुओं से loose कर देते हैं। यदि कंडक्टर सेल के positive और negative sides से जुड़े होते हैं, तो यह एक विद्युत सर्किट बनाता है। जब इलेक्ट्रॉन इस तरह के सर्किट से बहते हैं, तो वे बिजली उत्पन्न करते हैं।

कई सेल एक सौर पैनल बनाते हैं, और एक सौर सरणी बनाने के लिए कई पैनल (मॉड्यूल) एक साथ वायर्ड किए जा सकते हैं। जितने अधिक पैनल आप तैनात कर सकते हैं, उतनी अधिक ऊर्जा आप उत्पन्न करने की उम्मीद कर सकते हैं।

यहाँ एक उदाहरण है कि एक घर सौर ऊर्जा स्थापना कैसे काम करती है। सबसे पहले, सूरज की रोशनी छत पर एक सौर पैनल से टकराती है। पैनल ऊर्जा को DC Current में परिवर्तित करते हैं, जो एक इन्वर्टर में प्रवाहित होता है। इन्वर्टर DC से AC में बिजली को परिवर्तित करता है, जिसे आप फिर अपने घर को बिजली देने के लिए उपयोग कर सकते हैं।

सौर पैनलों किस चीज से बना होता हैं?

Photovoltaic (PV) सौर पैनल कई सौर कोशिकाओं से बने होते हैं। सौर सेल सिलिकॉन से बने होते हैं, अर्धचालक की तरह। वे एक positive layer और एक negative layer के साथ निर्मित होते हैं, जो एक बैटरी की तरह एक विद्युत क्षेत्र बनाते हैं।

सौर पैनल बिजली कैसे उत्पन्न करते हैं?

What is Solar System and How Do Solar System Work

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PV सौर पैनल Direct current(DC) बिजली उत्पन्न करते हैं। DC बिजली के साथ, इलेक्ट्रॉन एक सर्किट के चारों ओर एक दिशा में बहते हैं। यह उदाहरण एक बैटरी को प्रकाश बल्ब को दिखाता है। इलेक्ट्रॉनों को Lamp के माध्यम से बैटरी के Negative side से move करके, और बैटरी के Positive side पर लौटता है।

AC (Alternating current) बिजली के साथ, इलेक्ट्रॉनों को Push and Pull किया जाता है, और समय के साथ साथ इस प्रक्रिया को reverse भी होता है,  just like कार के इंजन के सिलेंडर की तरह। जब AC का तार चुंबक के बगल में घूमता है तो जनरेटर AC बिजली बनाता है।

AC बिजली को अमेरिकी विद्युत ग्रिड के लिए चुना गया था, मुख्यतः क्योंकि यह लंबी दूरी पर संचारित करने के लिए कम खर्चीला है। हालांकि, सौर पैनल DC बिजली बनाते हैं। हम AC ग्रिड में DC बिजली कैसे प्राप्त करते हैं?  हम एक इन्वर्टर का उपयोग करते हैं।

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ADVANTAGE OF SOLAR SYSTEM

  • RENEWABLE ऊर्जा स्रोत

सौर पैनलों के सभी लाभों में, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सौर ऊर्जा वास्तव में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है। यह दुनिया के सभी क्षेत्रों में दोहन किया जा सकता है और ये हर दिन उपलब्ध है। हम ऊर्जा के कुछ अन्य स्रोतों के विपरीत, सौर ऊर्जा से बाहर नहीं भाग सकते हैं। जब तक हमारे पास सूर्य है, तब तक सौर ऊर्जा सुलभ होगी, इसलिए सूरज की रोशनी कम से कम 5 बिलियन वर्षों तक हमारे लिए उपलब्ध रहेगी जब वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य मरने वाला है।

  • बिजली के बिल को कम करता है

चूंकि आप अपनी ऊर्जा की कुछ जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, जो आपके सौर मंडल ने उत्पन्न की है, तो आपके ऊर्जा बिलों में कमी आएगी। आप अपने बिल पर कितना बचाते हैं, यह सौर प्रणाली के आकार और आपकी बिजली या गर्मी के उपयोग पर निर्भर करेगा।

इसके अलावा, न केवल आप बिजली के बिल में बचत कर रहे हैं, लेकिन यदि आप अपने उपयोग से अधिक बिजली उत्पन्न करते हैं, तो अधिशेष को ग्रिड में वापस निर्यात किया जाएगा और आपको उस राशि के लिए बोनस भुगतान प्राप्त होगा.

  • विभिन्न उद्देश्यों

सौर ऊर्जा का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। आप बिजली (फोटोवोल्टिक) या गर्मी (सौर तापीय) उत्पन्न कर सकते हैं। सौर ऊर्जा का उपयोग ऊर्जा ग्रिड तक पहुंच के बिना क्षेत्रों में बिजली का उत्पादन करने के लिए किया जा सकता है, सीमित स्वच्छ पानी की आपूर्ति वाले क्षेत्रों में और अंतरिक्ष में उपग्रहों को बिजली देने के लिए।

अभी कुछ समय पहले, काफी तेजी से Transparent type window को लाया गया है जिससे हमलोग हवा के साथ साथ बिजली भी produce कर सकते हैं.

  • कम रखरखाव लागत

आमतौर पर सौर ऊर्जा प्रणालियों को बहुत अधिक रखरखाव की आवश्यकता नहीं होती है। आपको केवल उन्हें अपेक्षाकृत साफ रखने की आवश्यकता है, इसलिए उन्हें प्रति वर्ष एक से दो बार सफाई करना काम करेगा। यदि संदेह है, तो आप हमेशा विशेष सफाई कंपनियों पर भरोसा कर सकते हैं, इन्वर्टर के अलावा,

आपके सौर ऊर्जा प्रणाली को अधिकतम दक्षता पर चलाने के लिए केबलों को भी रखरखाव की आवश्यकता होती है। इसलिए, सौर प्रणाली की प्रारंभिक लागत को कवर करने के बाद, आप रखरखाव और मरम्मत कार्य पर बहुत कम खर्च की उम्मीद कर सकते हैं।

  • प्रौद्योगिकी विकास

सौर ऊर्जा उद्योग में प्रौद्योगिकी लगातार आगे बढ़ रही है और भविष्य में सुधार तेज होंगे। क्वांटम भौतिकी और नैनोटेक्नोलॉजी में नवाचारों से संभवतः सौर पैनलों और दोहरे, या यहां तक ​​कि ट्रिपल, सौर ऊर्जा प्रणालियों के विद्युत इनपुट की प्रभावशीलता में वृद्धि हो सकती है।

DISADVANTAGE OF SOLAR SYSTEM

  • लागत

सौर प्रणाली खरीदने की प्रारंभिक लागत काफी अधिक है। इसमें सोलर पैनल, इन्वर्टर, बैटरी, वायरिंग और इंस्टॉलेशन के लिए भुगतान शामिल है।जिस वजह से इसको लगाना थोडा महंगा पड़ता है फिर भी, सौर प्रौद्योगिकियां लगातार विकसित हो रही हैं, इसलिए यह मान लेना सुरक्षित है कि भविष्य में कीमतें नीचे जाएंगी।

  • मौसम पर निर्भर

यद्यपि सौर ऊर्जा अभी भी बादल और बारिश के दिनों में एकत्र की जा सकती है, सौर प्रणाली की दक्षता कम हो जाती है। सौर ऊर्जा को प्रभावी ढंग से इकट्ठा करने के लिए सौर पैनल सूर्य के प्रकाश पर निर्भर हैं। इसलिए, कुछ बादल छाए रहेंगे, बारिश के दिनों में ऊर्जा प्रणाली पर ध्यान देने योग्य प्रभाव पड़ सकता है।

आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सौर ऊर्जा को रात के दौरान एकत्र नहीं किया जा सकता है। दूसरी ओर, यदि आपको रात में या सर्दियों के दौरान काम करने के लिए अपने पानी के हीटिंग समाधान की आवश्यकता होती है, तो थर्मोडायनामिक पैनल विचार करने के लिए एक विकल्प हैं। जिससे हम रात में भी बिजली पा सकेंगे और इस्तेमाल कर पाएंगे.

  • सौर ऊर्जा भंडारण महंगा है

सौर ऊर्जा का अभी उपयोग किया जाना है, या इसे बड़ी बैटरी में संग्रहीत किया जा सकता है। ऑफ-द-ग्रिड सौर प्रणालियों में उपयोग की जाने वाली इन बैटरियों को दिन के दौरान चार्ज किया जा सकता है ताकि रात में ऊर्जा का उपयोग किया जा सके।

यह पूरे दिन सौर ऊर्जा का उपयोग करने के लिए एक अच्छा समाधान है लेकिन यह काफी महंगा भी है। ज्यादातर मामलों में, यह दिन के दौरान सिर्फ सौर ऊर्जा का उपयोग करने और रात के दौरान ग्रिड से ऊर्जा लेने के लिए अधिक स्मार्ट है.

  • यह बहुत ज्यादा जगह लेता है

जितनी अधिक बिजली आप पैदा करना चाहते हैं, उतने ही अधिक सौर पैनलों की आपको आवश्यकता होगी, जितना आप अधिक से अधिक धूप एकत्र करना चाहते हैं। सौर पैनलों को बहुत अधिक जगह की आवश्यकता होती है और कुछ छतें इतनी बड़ी नहीं होती हैं कि आप जितने सौर पैनल चाहते हैं, उतने फिट हो सकें।

  • प्रदूषण से संबद्ध

हालाँकि ऊर्जा के अन्य स्रोतों की तुलना में सौर ऊर्जा प्रणालियों से संबंधित प्रदूषण बहुत कम है, सौर ऊर्जा को प्रदूषण से जोड़ा जा सकता है। परिवहन और सौर प्रणाली की स्थापना ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन से जुड़ी हुई है। सौर फोटोवोल्टिक की निर्माण प्रक्रिया के दौरान उपयोग किए जाने वाले कुछ जहरीले पदार्थ और खतरनाक उत्पाद भी हैं,

जो अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण को प्रभावित कर सकते हैं। फिर भी, सौर ऊर्जा अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तुलना में बहुत कम प्रदूषण करती है।

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CONCLUSION

दोस्तों ये टॉपिक कैसा लगा हमें जरुर बताइयेगा जिससे मै आपलोगों का मन की बातें समझ पाए और हर दिन एक नए technology से आपलोगों को रूबरू करा सके जिससे मुझे बहुत खुशी होगी की मै इस ब्लॉग के जरिए आपलोग तक technical gyan पहुंचा सकू.

जिससे आपका technical gyan अच्छा हो और आप भी और किसी जरुरत मंद लोग तक ये बातें share कर सके. अगर आपके मन में किसी भी तरह का question है तो हमें comment या मेरे mail id पर mail करके पूछ सकते है. तो दोस्तों आप हमारे साथ बने रहे और रोज रोज एक नए तकनीक के बारे में जानते रहे.

Thank You.

 

MAC ADDRESS या PHYSICAL ADDRESS क्या होते है जाने हिंदी में

What is MAC Address or Physical Address

WHAT IS MAC ADDRESS OR PHYSICAL ADDRESS IN HINDI – MAC ADDRESS क्या होता है?

Hello Friends! Techno Gyan में आपका  स्वागत है नए टॉपिक What is MAC Address or Physical Address in Hindi में. आज बात करेंगे किसी भी computer या Laptop का MAC address  हम आसानी से कैसे देख सकते है तो चलिए आगे के ब्लॉग में सिखते है की What is MAC Address or Physical Address.

What is MAC Address or Physical Address

Image of  MAC Address or Physical Address in Hindi

MAC Address जिसको Media Access Control Address भी कहा जाता है वह  unique 48 bit Hardware Address है जो Laptop, Desktop, Mobile इत्यादि जैसे उपकरणों को assign किया गया है।ये 48 bit address globally unique होता है. Networking में MAC Address OSI Model की Layer 2 पर काम करता है. Local Area Network में communication के लिए MAC Address का उपयोग किया जाता हैं।

MAC Address को NIC Card पर company द्वारा assign किया जाता है जो की इसके हार्डवेयर में assign किया जाता है.

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MAC ADDRESS का पता COMPUTER में कैसे लगाये:

  • यदि आप Windows computer का इस्तेमाल कर रहे हैं तो command prompt पर जाएं और ‘getmac’ type करें जहां आप MAC Address पा सकते हैं।
  • आप command prompt में ipconfig /all type करके भी MAC Address को पता कर सकते हैं।
  • यदि आप एक Linux user हैं तो root पर जाएं और ifconfig -a कमांड टाइप करें

MAC Address 48 Bit का होता है और इसके दो भाग है, पहले में 24 Bits OUI (Organizational Unique Identifier) है और दुसरे में 24 bit को vendor के हिसाब से विभाजित किया गया है.

उदाहरण के लिए:

94:4B:5A:D8:R9:40 एक MAC Address है जिसमें 6 Blocks और कुल 48 Bits हैं जो पहले तीन block हैं जो IEEE द्वारा vendor को 24 bit assign किया गया है। एक vendor किसी भी PC के पहले 24bit को देख कर पहचान सकता है की वो computer HP का है या DELL का है या और किसी company का है.

यह मूल रूप से पहचानता है कि कौन सा Device आपके local network पर है। तो यहां यह कैसे काम करते हैं, जब डेटा आपके पास world wide इंटरनेट से home network में आता है तो आपके router को यह तय करने की आवश्यकता होती है कि कौन सा Device उस data को भेजने के लिए है.

यह इससे जुड़े सभी devices के MAC Address को track करता है। फिर एक IP address जिसे आमतौर पर 192.168… से प्रत्येक Device में शुरू किया जाता है उसे assign किया जाता है. यह Public IP से बहुत अलग है, जो बाकी Internet आपके पूरे home network के लिए आपका IP address है। आपका router सभी outbound  request का track रखता है.

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ISP preplanned MAC address का भी इस्तेमाल करता है ताकि हम जिस सेवा के लिए भुगतान कर रहे हैं उसे प्रदान करना आसान हो और यदि आप बिल का भुगतान समय पर नहीं कर रहे हैं तो वे Internet को Block करने के लिए भी इसका उपयोग करते हैं। एक Mac address को धोखा देना संभव है.

MAC ADDRESS का USE कैसे करे:

  • अगर हमारा लैपटॉप या computer चोरी हो जाता है तो MAC Address के द्वारा हम computer के location को track कर सकते है.
  • अगर एक साथ किसी भी Networking devices को communicate करते है तो वो भी इसी MAC Address के कारण होता है.

CONCLUSION

आपने इसमें पढ़ा की What is MAC Address or Physical Address. ये क्या होता है और इसका use किसलिए होते है. साथ ही हम किसी भी pc या लैपटॉप में MAC address कैसे देख सकते है.

तो आपलोगों को ये ब्लॉग कैसा लगा अगर अच्छा लगा तो please कमेंट करे और. अगर कुछ खामी हो तो उसको भी बताये. इससे Related और कोई प्रश्न है तो हमें बताये मैं उसका Answer जरूर दूंगा जिससे आपलोग उसके बारे में गहराई तक जान सके. आप को Tech से Related जो भी Questions है आप मुझसे पूछ सकते है या अपने बातो को हमारे ब्लॉग के जरिये शेयर कर सकते है.तो कृपया कमेंट जरुर करे.

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HOW TO WORK INDUCTION COOKER IN HINDI | BEST GUIDE [2026]

cooktop Works in Hindi

How Induction Cooker Works in Hindi. Hello Friends! TechnoGyan में आपका स्वागत है एक और नए ब्लॉग  में  जिसमे मैं आपलोगो के लिए एक नया Topic लेकर आया हु जिसमे हमलोग आज जानेगे की Induction Cooker क्या होता है। और ये(How Induction Cooker Works in Hindi) किस तरह से काम करता है, आजकल ये काफी use किया जा रहा है तो आइये चलते है और समझते है की ये क्या है और कैसे काम करता है।

WHAT IS INDUCTION COOKTOP? – इंडक्शन कुकर क्या होता है ?

इंडक्शन कुकिंग एक Electric heating element से या Radiation या Thermal Conduction के बजाय Electromagnetism के द्वारा एक खाना पकाने के बर्तन को गर्म करता है। क्योंकि ये बर्तन को सीधे गर्म करता है, और इससे तापमान में बहुत तेजी से वृद्धि हासिल की जा सकती है, और हीट सेटिंग में परिवर्तन तात्कालिक की जा सकती हैं।

Induction cooktops इलेक्ट्रिक या गैस-हीटेड तत्व का उपयोग करने के बजाय सीधे हीट बर्तनों और पैन को गर्म करते हैं। यह गैस या बिजली की तुलना में 50 प्रतिशत तक तेजी से पानी उबालता है, और यह सटीक तापमान बनाए रखता है। हमारे बर्तन के निचे का भाग नहीं जलते और जिस कारण हमलोग आसानी से उस बर्तन को साफ कर सकते है।

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Induction Cooktop काम करने में काफी Efficient होता  है। जिसका अर्थ है कि यह रसोई घर में कम waste heat उत्पन्न करता  है। इसे जल्दी से बंद किया जा सकता है, और गैस स्टोव की तुलना में काफी सुरक्षित होता हैं। कुकटॉप्स को आमतौर पर साफ करना भी आसान होता है, क्योंकि कुकटॉप खुद बहुत गर्म नहीं होता है।

HOW TO WORK INDUCTION COOKER? | HOW DOES INDUCTION COOKER WORKS IN HINDI | इंडक्शन कुकर कैसे काम करता है?

induction cooker
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इंडक्शन कुकिंग इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एनर्जी के द्वारा काम करता है। इस तरह की ऊर्जा AM और FM रेडियो, सेल फोन, वायरलेस लैपटॉप, माइक्रोवेव ओवन, इंफ्रारेड और Visible light के रूप में हर दिन हमारे आसपास होती है।

यह two part system पर काम करता है। सबसे पहले system है, खाना पकाने के उत्पाद की सिरेमिक सतह के नीचे एक तांबे का तार है। जब इस तार के माध्यम से एक विद्युत प्रवाह पारित किया जाता है तो यह ऊर्जा का विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र बनाता है।

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दूसरा System है, एक लोहे की कोर पैन को कुकटॉप पर रखा गया है। इस बिंदु पर पैन के चारों ओर गर्मी सक्रिय होती है। इन दोनों चरणों के पूरा होने तक सतह शांत रहती है।

इंडक्शन हीट होने के लिए, पैन का निचला हिस्सा लोहे से बना होना चाहिए, जिससे पैन चुंबकीय हो जाए। आप यह देखने के लिए एक साधारण परीक्षण कर सकते हैं कि आपका पैन इंडक्शन कुकटॉप के साथ काम करेगा या नहीं।

मै पर्सनली इस एक Induction Cooktop का इस्तेमाल काफी दिनों से कर रहा हु। जो काफी अच्छा रहा है अभी तक में. इसमें बिजली भी काफी कम use होता है।

यदि एक चुंबक नीचे की ओर चिपक जाता है, तो पैन एक इंडक्शन कुकटॉप पर काम करेगा। जब चुंबकीय पैन को खाना पकाने की सतह पर रखा जाता है, तो पैन में लोहे के अणु प्रति सेकंड 20,000-50,000 बार कंपन करना शुरू कर देते हैं। यह उन अणुओं के बीच का घर्षण है जो गर्मी पैदा करता है। सभी गर्मी पैन के तल में निहित हैं; यही कारण है कि सतह शांत रहती है जबकि आपका कुकवेयर गर्म रहता है।

REGULAR STOVETOPS AND INDUCTION COOKTOPS में अंतर

हम नियमित जो Stovetop इस्तेमाल करते है उसमे हमारे बर्तन direct contact के वजह से गरम होते हैं। नियमित Stovetop की लपटें या विद्युत ताप तत्व गर्मी उत्पन्न करते हैं, और उस ऊष्मा को थर्मल चालन के रूप में जाने वाली प्रक्रिया में बर्नर से बर्तन के base तक संपर्क के माध्यम से Transfer किया जाता है।

induction cooker

Image of how to work induction cooker in hindi

दूसरी ओर इंडक्शन कुकटॉप्स, गर्मी उत्पन्न नहीं करते हैं। Induction बर्नर में सिरेमिक सतह के ठीक नीचे एक coiled wire होता है, जो एक oscillating magnetic field उत्पन्न करता है।

इंडक्शन कुकटॉप्स आपके द्वारा उपयोग किए जाने वाले बर्तन और पैन इस system के साथ काम करने के लिए एक चुंबकीय सामग्री से बने होने चाहिए। इंडक्शन कुकटॉप एक चुंबकीय सामग्री में इलेक्ट्रॉनों को प्रेरित करेगा, जो विद्युत प्रवाह का निर्माण करके हमारे बर्तन तक गर्मी पहुचाने का काम करता है। जिससे हमारा बर्तन गरम होता है और हम उसको इस्तेमाल कर पाते हैं।

यदि आप अपने हाथ, या एक ग्लास पॉट को इंडक्शन कुकटॉप पर रखते हैं, तो हमें उसकी गर्मी महसुस नहीं होती क्योंकि वे चुंबकीय नहीं हैं और इसलिए इंडक्शन बर्नर के Alternating magnetic field से प्रभावित नहीं होता हैं।

किस TYPE का POT INDUCTION COOKER के साथ काम करेगा

चुंबकीय सामग्री जो Induction कुकटॉप्स के साथ अच्छी तरह से काम करती है वो कुछ इस तरह से हैं,  कच्चा लोहा, स्टील और चुंबकीय स्टेनलेस स्टील है (स्टेनलेस स्टील में कुछ लोहा होना चाहिए)। सिरेमिक क्लैड और enameled pots और pans, जैसे कि Le Creuset cookware, इंडक्शन चूल्हों के साथ काम करते हैं क्योंकि सिरेमिक परत के भीतर छिपा एक लोहे का पैन होता है, जो चुंबकीय होता है।

किस TYPE का POT इंडक्शन पर काम नहीं करेगा

एल्युमिनियम, ग्लास और कॉपर पैन इंडक्शन स्टोव के साथ काम नहीं करते हैं, जब तक कि वे नीचे की तरफ चुंबकीय सामग्री की परत के साथ नहीं बने हों।

कैसे जाने की हमारा पैन या बर्तन INDUCTION COOKER पर काम करेगा 

यदि आप सुनिश्चित नहीं हैं कि आपके पैन चुंबकीय हैं या नहीं, या आपके पैन किस सामग्री से बने हैं, तो यहां एक आसान ट्रिक है: एक चुंबक को लीजिये और पैन की निचली सतह के पास उस चुंबक को ले जाये। यदि पैन के आधार से चिपक जाता है, तो पॉट चुंबकीय है, और इसलिए एक इंडक्शन स्टोवटॉप के साथ काम करेगा।

हम INDUCTION COOKER पर क्यों SWITCH करे

इंडक्शन बर्नर के बारे में महान बात यह है कि वे efficient हैं स्टोव पर केवल पॉट गर्म होता है। साथ ही बर्नर गर्म पैन के संपर्क के अलावा बहुत गर्म नहीं होता है, इसलिए यह हमारे  और हमारे बच्चे के लिए काफी सुरक्षित है, जो इधर-उधर भाग सकता है। हमारे द्वारा हाल ही में उपयोग किए गए इंडक्शन बर्नर पर गलती से प्लास्टिक की थैली को पिघलाने की संभावना कम है।

INDUCTION COOKER के फायदे:

  • इसमें आग नहीं निकलता है जिससे घर का Temprature ज्यादा नहीं होता है और गर्मी भी नहीं लगती है।
  • इसमें सिलिंडर भरने और तेल का झंझट नहीं रहता।
  • छोटे बच्चो के लिए थोडा secure रहता है क्योकि आग नहीं रहता इसमें।
  • बिजली से चलता है लेकिन फिर भी ज्यादा बिजली का use नहीं होता है इसमें।
  • खाना बनाते समय इसमें आग लगने का डर नहीं रहता है।
  • इसके अंदर में एक खासियत ये है की जल्दी से कुछ भी गरम कर सकते है। क्योकि इसमें temprature काफी जल्दी बढ़ा सकते है।
  • इसको use करना काफी easy है। इसमें कोई माचिस या आग की जरुरत भी नहीं पड़ती है।

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CONCLUSION

इस ब्लॉग में आपने सिखा की How Induction Cooker Works या How does induction cookers works in Hindi अब आप समझ गए होंगे की ये किस तरह से वर्क करता है।

तो दोस्तों आपलोगो को ये ब्लॉग अच्छा लगा होगा अगर अच्छा लगा तो कृपया कमेंट करे और अगर कुछ कमी हो तो उसको भी बताये। इससे Related और कोई प्रश्न है तो हमें बताये मैं उसका Answer जरूर दूंगा जिससे आपलोग उसके बारे में गहराई तक जान सके।

आप को Tech से Related जो भी Questions है आप मुझसे पूछ सकते है या अपने बातो को हमारे ब्लॉग के जरिये दुसरे तक पहुंचा सकते है। 

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